CBSE री-इवैल्युएशन पोर्टल विवाद 2026: शिक्षा मंत्री का बड़ा एक्शन

Sun 24-May-2026,11:03 PM IST +05:30

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CBSE री-इवैल्युएशन पोर्टल विवाद 2026: शिक्षा मंत्री का बड़ा एक्शन Education News
  • CBSE री-इवैल्युएशन पोर्टल में तकनीकी सुधार के लिए IIT टीम तैनात. 

  • सिस्टम को ग्लिच-फ्री और पारदर्शी बनाने पर जोर. 

Delhi / Delhi :

Delhi / सीबीएसई कक्षा 12वीं के री-इवैल्युएशन पोर्टल में आई तकनीकी दिक्कतों और छात्रों को हो रही परेशानियों के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देशभर के विद्यार्थियों और अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत हस्तक्षेप किया है और सिस्टम को सुधारने के लिए एक विशेष तकनीकी पहल शुरू की है।

इस पहल के तहत अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम सीबीएसई की पूरी ऑनलाइन प्रणाली की समीक्षा करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य री-इवैल्युएशन पोर्टल को पूरी तरह “ग्लिच-फ्री” और अधिक पारदर्शी बनाना है, ताकि छात्रों को किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े।

जानकारी के अनुसार, यह टीम पोर्टल की स्टेबिलिटी, सर्वर परफॉर्मेंस और ट्रैफिक मैनेजमेंट की गहन जांच करेगी। पिछले कुछ समय से पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण क्रैश होने, लॉगिन में समस्या और पेमेंट फेलियर जैसी शिकायतें सामने आ रही थीं। अब इन सभी तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए विस्तृत ऑडिट किया जाएगा।

इसके अलावा, विशेषज्ञ टीम यह भी देखेगी कि लॉगिन सिस्टम, यूजर ऑथेंटिकेशन और पेमेंट गेटवे पूरी तरह सुरक्षित और सटीक हों, ताकि छात्रों के पैसे कटने या किसी तरह की तकनीकी त्रुटि की संभावना न रहे। सिस्टम के वर्कफ्लो को और मजबूत बनाने के लिए भी सुधारात्मक सुझाव दिए जाएंगे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में छात्रों के भविष्य के साथ समझौता नहीं किया जाएगा और सीबीएसई को तुरंत प्रभाव से सभी आवश्यक सुधार लागू करने होंगे।

सरकार का मानना है कि आईआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों की विशेषज्ञता से सीबीएसई की डिजिटल प्रणाली और अधिक मजबूत, सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और तकनीकी सुधार की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।

अब उम्मीद की जा रही है कि इस हस्तक्षेप के बाद री-इवैल्युएशन प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी और छात्रों को बिना किसी तकनीकी बाधा के समय पर परिणाम मिल सकेंगे।