भारत की अपतटीय सुरक्षा 2026: OSCC बैठक में ऊर्जा और समुद्री ढांचे की समीक्षा

Fri 22-May-2026,11:52 PM IST +05:30

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भारत की अपतटीय सुरक्षा 2026: OSCC बैठक में ऊर्जा और समुद्री ढांचे की समीक्षा India Offshore Security
  • अपतटीय ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा ढांचे की समीक्षा. 

  • ड्रोन और आधुनिक समुद्री खतरों से निपटने पर चर्चा. 

Delhi / Delhi :

Delhi / भारत की समुद्री और ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 21 मई 2026 को अहमदाबाद में 138वीं अपतटीय सुरक्षा समन्वय समिति (OSCC) की बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के अपतटीय प्रतिष्ठानों, तेल-गैस संरचनाओं और समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और उसे आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप और अधिक मजबूत बनाना था।

आज के समय में जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, समुद्री क्षेत्र में जोखिम भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में इस बैठक को भारत की ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा नीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को बढ़ाने, निगरानी प्रणाली को उन्नत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।

आधुनिक खतरों पर गहन चर्चा
बैठक में यह भी माना गया कि आने वाले समय में पारंपरिक खतरों के साथ-साथ तकनीकी और आधुनिक युद्ध से जुड़े जोखिम भी बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से ड्रोन, मानवरहित सिस्टम और साइबर-आधारित समुद्री खतरों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि इन नए खतरों से निपटने के लिए भारत को अपनी तकनीकी क्षमता और रियल-टाइम निगरानी प्रणाली को और मजबूत करना होगा।

इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बढ़ रही अपतटीय खोज और ऊर्जा संबंधित गतिविधियों को भी बैठक में महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, इसलिए यहां सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करना आवश्यक माना गया।

अंतर-एजेंसी समन्वय पर फोकस
इस बैठक में भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, वायुसेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, खुफिया ब्यूरो, तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग, महानिदेशक जहाजरानी और कई राज्य पुलिस बलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सभी एजेंसियों ने इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक संयुक्त प्रयास है। इसलिए सभी विभागों के बीच सूचना साझाकरण, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और संयुक्त अभ्यास को और मजबूत किया जाएगा।

ऊर्जा सुरक्षा और अपतटीय संपत्तियों की रक्षा
भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों और अपतटीय क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इन क्षेत्रों की सुरक्षा सीधे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ जाती है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसी भी आपात स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए मजबूत बैकअप और सुरक्षा रणनीति तैयार करना जरूरी है।

बैठक के अंत में सभी हितधारकों ने भारत की अपतटीय संपत्तियों और समुद्री ढांचे की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बैठक इस बात का संकेत है कि भारत आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा को लेकर और अधिक तकनीकी, संगठित और भविष्य-उन्मुख रणनीति अपनाने जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह OSCC बैठक देश की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रक्षा ढांचे को नई दिशा देने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।