NEET पेपर लीक मामला 2026: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, NTA से जवाब तलब और परीक्षा सुधार पर बड़ा सवाल

Mon 25-May-2026,02:07 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

NEET पेपर लीक मामला 2026: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, NTA से जवाब तलब और परीक्षा सुधार पर बड़ा सवाल NEET Paper Leak Case
  • NEET पेपर लीक केस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी. 

  • NTA से जवाब तलब, केंद्र सरकार को नोटिस जारी. 

  • परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग तेज. 

Delhi / Delhi :

Delhi / सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक मामले पर सुनवाई करते हुए सोमवार को एक बेहद अहम टिप्पणी की, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि पिछले पेपर लीक मामलों से कोई ठोस सबक नहीं लिया गया, जिसके कारण बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।

यह सुनवाई नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर हो रही थी, जो देश में NEET और अन्य प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करती है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं, जिनकी वजह से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही कोर्ट ने NTA से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि पिछली सुनवाई के दौरान जिस मॉनिटरिंग कमेटी के गठन के निर्देश दिए गए थे, उसका अब तक क्या हुआ और उसने क्या काम किया है।

इस मामले में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने भी अदालत का रुख किया है। याचिका में कहा गया है कि NTA की कार्यप्रणाली में प्रणालीगत विफलता (systemic failure) देखने को मिल रही है, जिसके कारण NEET-UG जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील तन्वी दुबे ने अदालत से मांग की है कि या तो NTA का पुनर्गठन किया जाए या फिर किसी नई, अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम संस्था को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि परीक्षा को न्यायिक निगरानी में दोबारा कराया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

याचिका में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति बनाई जाए। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें और इसमें साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हों, ताकि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया जा सके।

सरकार ने इस मामले की जांच पहले ही CBI को सौंप दी है, जिससे यह साफ है कि मामला गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ती चिंता को देखते हुए अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं।