भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA): 100 औद्योगिक पार्कों की बड़ी पहल, निवेश और रोजगार पर फोकस

Fri 29-May-2026,11:51 PM IST +05:30

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भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA): 100 औद्योगिक पार्कों की बड़ी पहल, निवेश और रोजगार पर फोकस Bhavya Scheme
  • भारत में 100 आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना. 

  • निवेश, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर जोर. 

  • राज्य और निजी साझेदारी से औद्योगिक विकास को गति. 

Delhi / Delhi :

Delhi / नई दिल्ली में आयोजित यह महत्वपूर्ण कार्यशाला भारत के औद्योगिक विकास और भविष्य की दिशा तय करने वाली एक बड़ी पहल के रूप में देखी जा रही है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तहत राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश में मजबूत औद्योगिक बुनियादी ढांचे को विकसित करना और निवेश के लिए तैयार वातावरण बनाना था ।

इस कार्यशाला में देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें उद्योग विभाग, BIS, NTH, राज्य औद्योगिक विकास निगम, और अन्य प्रमुख संस्थानों के अधिकारी भी शामिल रहे। इस व्यापक भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब औद्योगिक विकास को केवल केंद्र की नीति नहीं, बल्कि एक साझा राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ा रहा है ।

कार्यशाला में सबसे महत्वपूर्ण चर्चा “भव्य योजना” यानी भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) पर केंद्रित रही। इस योजना का उद्देश्य देश में 100 नए निवेश-तैयार, प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करना है। इसके लिए 33,660 करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया गया है, जिससे आधुनिक औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया जा सके ।

इस योजना की खास बात यह है कि इसमें केवल इमारतें या जमीन विकसित करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम को तैयार करना है। इसमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, स्मार्ट सर्विसेज, उपयोगिता सुविधाएं और निवेशक सुविधा केंद्र शामिल हैं। इसका उद्देश्य है कि किसी भी उद्योग को स्थापित करने के लिए तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर तुरंत उपलब्ध हो सके ।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि इस योजना में राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी डेवलपर्स की साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार का मानना है कि जब निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी नीति मिलती है, तो विकास की गति और तेज हो जाती है ।

इसके साथ ही गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। NTH और BIS जैसी संस्थाओं ने ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, सोलर उपकरण और एयरोस्पेस कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में परीक्षण क्षमता को मजबूत करने की जानकारी दी। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारत में बनने वाले उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतरें ।

डीपीआईआईटी अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी औद्योगिक पार्क की सफलता केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि वह कितना निवेश आकर्षित कर पाता है और कितनी तेजी से उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित होता है। राज्यों को सलाह दी गई कि वे निवेशक-केंद्रित प्रस्ताव तैयार करें और भूमि, कनेक्टिविटी और उद्योग जरूरतों को ध्यान में रखें ।

कुल मिलाकर यह कार्यशाला भारत के औद्योगिक भविष्य के लिए एक मजबूत आधार बनाती है। इसमें स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारत अब केवल निर्माण का देश नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश और उत्पादन का केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भव्य योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो देश को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के और करीब ले जाती है।