उपराष्ट्रपति दावणगेरे दौरा: बीडीटी कॉलेज प्लेटिनम जुबली में युवाओं को विकसित भारत का संदेश
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Davanagere News
उपराष्ट्रपति ने युवाओं को विकसित भारत के निर्माण का संदेश दिया.
तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार और स्टार्टअप पर दिया जोर.
नशामुक्त जीवन और नैतिक मूल्यों पर दिया महत्वपूर्ण संदेश.
Delhi / कर्नाटक के दावणगेरे स्थित यूनिवर्सिटी बीडीटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्लेटिनम जुबली समारोह में उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के इंजीनियर सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के मजबूत स्तंभ हैं, जिन पर भविष्य की दिशा तय करने की जिम्मेदारी है।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि देश का युवा वर्ग अगर नवाचार, अनुसंधान और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े तो भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने इंजीनियरिंग संस्थानों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि ये संस्थान केवल डिग्री देने वाले केंद्र नहीं, बल्कि समस्या समाधानकर्ता, नवप्रवर्तक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की प्रयोगशालाएँ हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही विभिन्न योजनाओं जैसे डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी पहल युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर युवा, वैज्ञानिक, इंजीनियर और उद्यमी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कॉलेज द्वारा स्थापित एआईसीटीई आईडीईए लैब और ड्रोन टेक्नोलॉजी लैब जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और नवाचार की दिशा में मजबूत बनाते हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने संस्थान के 75 वर्षों की यात्रा को गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि यह विरासत, समर्पण और उत्कृष्टता का प्रतीक है। उन्होंने संस्थान के संस्थापकों और योगदान देने वाले महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि भी दी।
छात्रों को प्रेरित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान का उपयोग हमेशा विनम्रता, ईमानदारी और समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीक का उपयोग मानवता के हित में ही होना चाहिए, न कि उसके नुकसान के लिए।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने नशे के खिलाफ भी सख्त संदेश देते हुए युवाओं से कहा कि नशीले पदार्थों से दूर रहना ही एक सशक्त और सफल जीवन की कुंजी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्थान आने वाले समय में भारत की तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा और उत्कृष्टता का केंद्र बना रहेगा।