खरीफ 2026 कृषि सम्मेलन: बीज, बीमा और प्राकृतिक खेती पर सरकार की बड़ी तैयारी

Fri 29-May-2026,11:44 PM IST +05:30

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खरीफ 2026 कृषि सम्मेलन: बीज, बीमा और प्राकृतिक खेती पर सरकार की बड़ी तैयारी Kharif 2026
  • खरीफ 2026 के लिए बीज और कृषि योजनाओं की पूरी तैयारी. 

  • फसल बीमा, कृषि ऋण और प्राकृतिक खेती पर विशेष फोकस. 

  • किसानों की आय बढ़ाने और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की पहल. 

Delhi / Delhi :

Delhi / केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा खरीफ कृषि सम्मेलन में दिए गए संदेश से यह स्पष्ट होता है कि देश कृषि क्षेत्र को एक नए वैज्ञानिक और संगठित युग में ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह पूरा सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि आने वाले खरीफ 2026 सीजन के लिए एक विस्तृत रोडमैप और तैयारी का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है ।

नई दिल्ली के पूसा स्थित सुब्रमण्यम हॉल में आयोजित इस राष्ट्रीय खरीफ कृषि सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि, केवीके, प्रगतिशील किसान और नीति निर्माता एक साथ जुड़े। इस व्यापक संवाद का मुख्य उद्देश्य था कि खरीफ सीजन को केवल चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि समन्वय और किसान-केंद्रित नीति के अवसर के रूप में विकसित किया जाए ।

केंद्रीय मंत्री ने सबसे पहले बीज व्यवस्था पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 के लिए देश में बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। जहां लगभग 173 लाख क्विंटल बीज की जरूरत है, वहीं 192 लाख क्विंटल बीज पहले से उपलब्ध है। यह अतिरिक्त उपलब्धता किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे समय पर बुवाई सुनिश्चित की जा सकेगी ।

इसके साथ ही 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार भी तैयार किया गया है, ताकि मौसम की अनिश्चितता या पुनर्बुवाई की स्थिति में किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। यह कदम कृषि आपदा प्रबंधन की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है ।

किसानों की पहचान और योजनाओं के लाभ को आसान बनाने के लिए फार्मर आईडी अभियान को भी तेजी से आगे बढ़ाया गया है। अब तक 9 करोड़ 76 लाख से अधिक किसानों की डिजिटल पहचान तैयार की जा चुकी है, जिससे योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सीधे पात्र किसानों तक पहुंच सकेगा ।

कृषि ऋण के मुद्दे पर भी मंत्री ने महत्वपूर्ण संकेत दिए। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कृषि ऋण का स्तर अलग-अलग है, खासकर पूर्वी भारत में यह अपेक्षाकृत कम है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए बैंकों के साथ समन्वय कर किसानों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी ।

फसल बीमा योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी कई सुधारों पर चर्चा हुई। क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट और रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से फसल नुकसान का आकलन अधिक सटीक बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही, बीमा दावों के भुगतान में देरी होने पर 12 प्रतिशत ब्याज देने का प्रावधान किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना गया ।

नकली कीटनाशक और कृषि इनपुट की समस्या पर भी गंभीर चर्चा हुई। सरकार ने राज्यों से कहा कि अधिक सैंपलिंग, मजबूत लैब नेटवर्क और एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशालाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिल सके ।

इसके अलावा प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, फसल विविधता और राज्यवार कृषि रोडमैप जैसे विषयों पर भी व्यापक विचार हुआ। 20 लाख किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण करना इस दिशा में बढ़ती जागरूकता का संकेत है ।

अंत में यह सम्मेलन इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि भारत की कृषि अब केवल परंपरागत ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक तकनीक, डिजिटल प्रणाली और किसान सशक्तिकरण पर आधारित एक आधुनिक मिशन बन चुकी है। खरीफ 2026 की तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि देश कृषि को एक मजबूत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ।