आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा को WHO वैश्विक मानकों से जोड़ने की समीक्षा बैठक

Wed 27-May-2026,11:40 PM IST +05:30

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आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा को WHO वैश्विक मानकों से जोड़ने की समीक्षा बैठक Ayush Ministry News
  • आयुष मंत्रालय की ICHI-NHIC पर उच्च स्तरीय बैठक. 

  • आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी को WHO मानकों से जोड़ने की पहल. 

  • वैश्विक स्वास्थ्य और डिजिटल कोडिंग सिस्टम को मजबूत करना. 

Delhi / Delhi :

Delhi / आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक मानकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (ICHI) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड (NHIC) के विकास पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। यह बैठक 25-26 मई 2026 को ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुई।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ICHI ढांचे के साथ एकीकृत करना है, ताकि एक मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से मजबूत कोडिंग प्रणाली विकसित की जा सके। इससे न केवल चिकित्सकीय रिकॉर्डिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा साझा करने, अनुसंधान को मजबूत करने और स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था में बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने की। उन्होंने कहा कि यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है। इससे न केवल दस्तावेजीकरण प्रणाली मजबूत होगी बल्कि डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में भी बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित होगी।

उद्घाटन सत्र में सीसीआरएएस के उप महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने स्वागत भाषण दिया, जबकि आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने मानकीकृत चिकित्सा शब्दावली के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके अलावा WHO और अन्य अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी तकनीकी सुझाव साझा किए।

तकनीकी सत्रों में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए अलग-अलग कोडिंग ढांचे पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने चार-स्तरीय पदानुक्रमित कोडिंग निर्देशिकाओं की समीक्षा की और उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया।

इस बैठक में देश के प्रमुख संस्थानों जैसे CCRAS, CCRS, CCRUM, ITRA, AIIA और अन्य संस्थानों के लगभग 30 वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर इस बात पर सहमति जताई कि यह पहल भारत की पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस दो दिवसीय परामर्श का अंतिम मसौदा जुलाई 2026 में होने वाली WHO-ICHI ASU अल्फा ड्राफ्ट संपादकीय कार्यशाला के लिए आधार दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे इस पूरी प्रक्रिया को एक अंतरराष्ट्रीय रूप मिलेगा।