भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता 2026: एनआईबीई ग्रुप डिफेंस कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन और सूर्यस्त्र रॉकेट प्रणाली

Sat 23-May-2026,11:48 PM IST +05:30

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भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता 2026: एनआईबीई ग्रुप डिफेंस कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन और सूर्यस्त्र रॉकेट प्रणाली Defence Manufacturing India
  • शिरडी में एनआईबीई ग्रुप डिफेंस कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन. 

  • सूर्यस्त्र रॉकेट सिस्टम और उन्नत रक्षा तकनीक का अनावरण. 

  • भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया को बढ़ावा. 

Delhi / Delhi :

Delhi / भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने शिरडी में एनआईबीई ग्रुप के अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण परिसर का उद्घाटन किया। यह परिसर भारत की बढ़ती आत्मनिर्भर रक्षा नीति और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम ने भारत की उस दिशा को और स्पष्ट किया जिसमें देश अब रक्षा उपकरणों और उन्नत सैन्य तकनीक के निर्माण में विदेशी निर्भरता को तेजी से कम कर रहा है।

आधुनिक रक्षा तकनीक की नई शुरुआत
इस परिसर में उन्नत तोपखाने प्रणालियों, मिसाइल तकनीक, रॉकेट सिस्टम, ऊर्जा सामग्री और स्वायत्त रक्षा प्लेटफॉर्म के निर्माण की सुविधा विकसित की गई है। इसके साथ ही भारत की पहली 300 किलोमीटर रेंज वाली “सूर्यस्त्र” रॉकेट प्रणाली को भी लॉन्च किया गया, जो देश की रक्षा क्षमता को एक नई ऊंचाई प्रदान करती है।

इस परियोजना के तहत एक नया मिसाइल कॉम्प्लेक्स भी स्थापित किया गया है, जो भविष्य की रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके साथ ही स्वदेशी टीएनटी और आरडीएक्स उत्पादन तकनीक का अनावरण भी किया गया, जो भारत को विस्फोटक सामग्री में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अंतरिक्ष और रक्षा का संयुक्त विकास
इस कार्यक्रम में एनआईबीई ग्रुप और ब्लैक स्काई के बीच उपग्रह संयोजन (Satellite Assembly) को लेकर समझौता भी हुआ। यह भारत की अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक के बीच बढ़ते तालमेल को दर्शाता है। आने वाले समय में यह सहयोग भारत की निगरानी और रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करेगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारत को अपने हथियार और रक्षा प्रणाली खुद बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी, क्योंकि भविष्य की सुरक्षा तकनीक पर आधारित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सेना के आकार पर नहीं बल्कि तकनीक, स्वचालन और गोला-बारूद की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि रक्षा उत्पादन अब केवल सरकारी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी उद्योग की भागीदारी से यह तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 25-30% तक पहुंच चुकी है और भविष्य में इसे 50% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

नई तकनीक और रोजगार के अवसर
यह नया रक्षा परिसर केवल हथियार निर्माण केंद्र नहीं है, बल्कि एक व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) भी तैयार करेगा। इसके माध्यम से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी बड़ा अवसर मिलेगा।

गोला-बारूद, रॉकेट सिस्टम और मिसाइल निर्माण से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार दोनों मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

यह परियोजना भारत की रक्षा नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है। अब भारत केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बन रहा है। एनआईबीई ग्रुप का यह कॉम्प्लेक्स आने वाले समय में भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।