कर्नाटक कांग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र गिरफ्तार: करोड़ों की ज्वैलरी और कैश जब्त
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कर्नाटक कांग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र ED गिरफ्तारी.
अवैध सट्टेबाजी और कैसिनो कारोबार में शामिल.
बैंक खातों और लॉकर से करोड़ों की संपत्ति जब्त.
Bengaluru / कर्नाटक से कांग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को सिक्किम से गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत हुई है। ED ने बताया कि केसी वीरेंद्र पर अवैध ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी का आरोप है। शुक्रवार को ED की टीम ने उनके ठिकानों पर छापा मारा, जिसमें भारी मात्रा में कैश और संपत्ति बरामद हुई। जांच के दौरान एजेंसी को 12 करोड़ रुपए कैश, 6 करोड़ रुपए मूल्य की गोल्ड ज्वैलरी और लगभग 1 करोड़ की फॉरेन करेंसी मिली। इसके अलावा चार लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।
केसी वीरेंद्र कर्नाटक की चित्रदुर्ग विधानसभा के विधायक हैं। उनके गोवा में कसीनो कारोबार में हिस्सेदारी होने की जानकारी भी मिली है। बताया जा रहा है कि वे करीब पांच कैसिनो के मालिक हैं, जिनमें प्रसिद्ध पप्पीज कसीनो भी शामिल है। कर्नाटक में पिछले आठ दिनों के भीतर यह दूसरा मामला है जब कांग्रेस के विधायक ED की जांच में फंसे हैं। इससे पहले 14 अगस्त को ED ने कर्नाटक के कांग्रेस विधायक सतीश कृष्ण सैल के घर से 1.41 करोड़ रुपए जब्त किए थे।
सतीश कृष्ण सैल उत्तर कन्नड़ जिले की कारवार विधानसभा सीट से विधायक हैं। ED ने उनके और उनके परिवार के बैंक लॉकरों से 6.75 किलो सोने की ज्वेलरी और बिस्किट भी बरामद किए थे। तलाशी में मिले कैश और सोने के अलावा उनके बैंक खातों में जमा ₹14.13 करोड़ को फ्रीज किया गया। साथ ही कई अहम दस्तावेज, ई-मेल और रिकॉर्ड भी ED ने जब्त किए।
सतीश कृष्ण सैल पर आरोप है कि साल 2010 में उन्होंने अन्य कंपनियों और बेलकेरी पोर्ट के अधिकारियों के साथ मिलकर अवैध तरीके से करीब 1.25 लाख मीट्रिक टन आयरन लौह अयस्क का निर्यात किया। इस अवैध निर्यात की कुल कीमत लगभग ₹86.78 करोड़ बताई गई है। ED की कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि राज्य में राजनीतिक हस्तियों की वित्तीय गतिविधियों की जांच लगातार तेज हो रही है।
कर्नाटक में अब तक की हुई यह गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती मामलों की श्रृंखला राज्य की राजनीति और कानून व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है। ED का कहना है कि आगे भी जांच जारी रहेगी और सभी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जाएगी। इस बीच कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर दबाव बढ़ गया है और राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इस मामले ने यह भी उजागर किया कि राजनीतिक पद का दुरुपयोग कर अवैध गतिविधियों में शामिल होना और गैरकानूनी वित्तीय लेनदेन करना गंभीर अपराध है। ED की कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह किसी भी पद पर हो।