Iran-Israel War: छठे दिन भी जारी मिसाइल हमले, मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा
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Iran-Israel War
ईरान-इजरायल संघर्ष छठे दिन भी जारी.
लेबनान और कुवैत तक फैला युद्ध का असर.
बढ़ते हमलों से वैश्विक चिंता बढ़ी.
Iran / मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब गंभीर रूप ले चुका है। गुरुवार को यह जंग छठे दिन में प्रवेश कर गई और पूरे क्षेत्र में लगातार मिसाइल हमले, एयरस्ट्राइक और जवाबी कार्रवाई जारी है। हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि फिलहाल इस संघर्ष के जल्दी खत्म होने के कोई स्पष्ट संकेत नजर नहीं आ रहे। युद्ध का असर अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लेबनान, कुवैत, यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे कई देशों तक फैल गया है।
इस संघर्ष में सबसे अधिक नुकसान ईरान को हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक ईरान में 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लेबनान में लगभग 60 लोगों की जान गई है, जबकि इजरायल में करीब 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं कुवैत में एक ड्रोन हमले में अमेरिका के 6 सैनिक मारे गए। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी दर्जनों लोग इस संघर्ष की चपेट में आ चुके हैं। इन हमलों में सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ आम नागरिक भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं।
इजरायली मीडिया के मुताबिक ईरान ने एक बार फिर इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इस हमले के बाद यरुशलम में सायरन बजने लगे और कई इलाकों में धमाकों की आवाज सुनाई दी। इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने तुरंत अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया और मिसाइलों को हवा में ही रोकने की कोशिश की। सेना ने नागरिकों को मोबाइल अलर्ट जारी कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।
इधर लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ गया है। इजरायल ने राजधानी बेरूत और आसपास के कई इलाकों में एयरस्ट्राइक की है। इसके अलावा उत्तरी लेबनान के त्रिपोली शहर में स्थित बेड़्दावी फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप को भी निशाना बनाया गया। यह उत्तरी लेबनान का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर माना जाता है। वहीं लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह ने दावा किया है कि इजरायल की कार्रवाई पहले से योजनाबद्ध थी और उसने इजरायल की ओर कई रॉकेट दागे हैं।
कुवैत में भी इस संघर्ष का असर दिखाई दिया। यहां एक ड्रोन हमले में अमेरिका के छह सैनिक मारे गए। पेंटागन ने दो सैनिकों की पहचान सार्वजनिक करते हुए बताया कि चीफ वारंट ऑफिसर रॉबर्ट मार्जन और मेजर जेफरी ओ’ब्रायन इस हमले में मारे गए सैनिकों में शामिल हैं। बताया गया कि यह हमला कुवैत में स्थित एक कमांड सेंटर पर हुआ था।
समुद्री क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है। कुवैत के तट के पास एक तेल टैंकर पर हमला किया गया। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UK Maritime Trade Operations के अनुसार उत्तरी फारस की खाड़ी में जोरदार धमाका हुआ और इसके बाद एक छोटा जहाज वहां से निकलता देखा गया। हालांकि इस हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें लिमपेट माइंस का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
ईरान की राजधानी तेहरान और पश्चिमी शहर सनंदज में भी कई धमाकों की खबरें सामने आई हैं। उत्तर-पश्चिमी शहर बुकान में भारी बमबारी से गवर्नरेट बिल्डिंग समेत कई घर और व्यावसायिक इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद तेहरान से बड़ी संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं। शुरुआती दो दिनों में ही लगभग एक लाख लोग शहर छोड़ चुके हैं।
इस बीच अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS देना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। इस हमले में 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हुई और 32 घायल सैनिकों को बचाया गया। बताया गया कि यह युद्धपोत भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू से लौट रहा था।
अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने के लिए एक प्रस्ताव लाया गया, लेकिन 53 के मुकाबले 47 वोटों से यह प्रस्ताव खारिज हो गया। इससे ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने की छूट मिल गई है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को निकालना भी शुरू कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार अब तक 17,500 अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसके वैश्विक असर भी सामने आ सकते हैं। तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है और शरणार्थी संकट भी बढ़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत शुरू होती है या यह संघर्ष और ज्यादा व्यापक रूप ले लेता है।