गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी में साहित्यकार अपमान विवाद

Sat 10-Jan-2026,04:41 PM IST +05:30

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गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी में साहित्यकार अपमान विवाद Guru-Ghasidas-University-Literary-Row
  • राष्ट्रीय परिसंवाद विवाद ने छात्र राजनीति और साहित्यिक जगत को जोड़ा, राष्ट्रपति तक पहुंचा मामला।

  • अकादमिक गरिमा, अतिथि सम्मान और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

Chhattisgarh / Bilaspur :

Bilashpur/ गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बिलासपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकार और कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ हुए कथित अपमानजनक व्यवहार ने अब बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। इस घटना के विरोध में छात्र संगठन एनएसयूआई, नागरिक मंच और प्रदेश के कई प्रतिष्ठित साहित्यकार खुलकर सामने आ गए हैं। सभी ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल को पद से हटाने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।

एनएसयूआई का प्रदर्शन, कुलपति का पुतला दहन

घटना के विरोध में शुक्रवार को एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने कुलपति का पुतला दहन कर नारेबाजी की। एनएसयूआई का आरोप है कि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली और विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के संयुक्त कार्यक्रम में कुलपति ने असहमति जताने पर आमंत्रित वरिष्ठ साहित्यकार को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और कार्यक्रम से बाहर करवा दिया।

शैक्षणिक गरिमा और सांस्कृतिक मूल्यों पर सवाल

एनएसयूआई नेताओं का कहना है कि यह घटना केवल एक लेखक का अपमान नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की अकादमिक गरिमा और भारतीय संस्कृति की “अतिथि देवो भवः” परंपरा पर सीधा आघात है। संगठन ने आरोप लगाया कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में विश्वविद्यालय अव्यवस्था, प्रशासनिक उदासीनता और विवादों का केंद्र बन गया है।

पुराने मामलों को भी जोड़ा गया

प्रदर्शनकारियों ने छात्रों की सुरक्षा में लापरवाही, फीस वृद्धि, नियुक्तियों में अनियमितता और छात्र अर्सलान अंसारी की मृत्यु जैसे पुराने मामलों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि ये सभी घटनाएं विश्वविद्यालय प्रशासन की विफलता को दर्शाती हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और कलेक्टोरेट मार्च

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कुलपति को हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं नागरिक मंच और स्थानीय साहित्यकारों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

साहित्यकारों का कहना है कि इस घटना से देशभर के लेखकों में आक्रोश है। उन्होंने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर विश्वविद्यालय की गरिमा और शैक्षणिक माहौल की रक्षा करने की अपील की है।