अल-फलाह यूनिवर्सिटी घोटाला: ईडी की चार्जशीट में फर्जी डॉक्टर, मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों के विदेशी लेनदेन का खुलासा

Sat 17-Jan-2026,04:36 PM IST +05:30

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी घोटाला: ईडी की चार्जशीट में फर्जी डॉक्टर, मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों के विदेशी लेनदेन का खुलासा Al Falah University
  • फर्जी डॉक्टरों और नकली मरीजों के जरिए नियमों का उल्लंघन.

  • छात्रों से गलत जानकारी देकर फीस वसूली का आरोप.

  • 13.10 करोड़ रुपये के विदेशी लेनदेन की जांच.

Delhi / Delhi :

Delhi / प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें संस्थान को वर्षों तक कथित तौर पर फर्जी तरीके से चलाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ईडी के अनुसार यह मामला केवल नियमों की अनदेखी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नियामकीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी एजेंसियों को गुमराह करने की एक सुनियोजित साजिश सामने आई है।

चार्जशीट में दावा किया गया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े मेडिकल कॉलेज पर जावेद सिद्दीकी का पूरी तरह सेंट्रलाइज्ड और प्रत्यक्ष नियंत्रण था। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों को पूरा दिखाने के लिए दर्जनों डॉक्टरों की केवल “ऑन-पेपर” नियुक्ति की गई। ये डॉक्टर न तो नियमित रूप से कैंपस में मौजूद रहते थे और न ही पढ़ाने या मरीजों के इलाज में उनकी कोई वास्तविक भूमिका थी। जांच के दौरान कुछ डॉक्टरों ने स्वीकार किया कि वे घर से काम कर रहे थे, जिसे ईडी ने एक अवैध और सुनियोजित व्यवस्था बताया है। इन सभी नियुक्तियों को पहले मानव संसाधन विभाग की सिफारिश मिली और अंततः सिद्दीकी की मंजूरी से ही उन्हें लागू किया गया।

सबसे गंभीर आरोप रेड फोर्ट ब्लास्ट केस के मुख्य आरोपी उमर-उन-नबी की नियुक्ति से जुड़ा है। ईडी का कहना है कि बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन या बैकग्राउंड चेक के उसे यूनिवर्सिटी में नौकरी दी गई। इसी तरह कई अन्य लोगों की भी नियुक्तियां बिना किसी जांच-पड़ताल के की गईं, जिन पर अंतिम मुहर खुद सिद्दीकी ने लगाई।

जांच में यह भी सामने आया कि निरीक्षण के समय अस्पताल में फर्जी मरीजों की व्यवस्था की जाती थी ताकि मरीजों की संख्या ज्यादा दिखाई जा सके। आईटी हेड फर्दीन बेग ने अपने बयान में स्वीकार किया कि ASHA वर्कर्स के जरिए मरीजों को लाया जाता था और उन्हें नकद भुगतान किया जाता था। इन भुगतानों का बाकायदा रिकॉर्ड रखा जाता था और उच्च स्तर पर इसकी मंजूरी दी जाती थी।

ईडी ने आरोप लगाया है कि निरीक्षण से पहले CCTV, इंटरनेट, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं केवल दिखावे के लिए अस्थायी रूप से दुरुस्त की जाती थीं। नवंबर 2025 में NAAC के शो-कॉज नोटिस के बाद यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में भी हेरफेर की गई और UGC मान्यता से जुड़े भ्रामक दावे हटाए या बदले गए। चार्जशीट के अनुसार छात्रों को यूनिवर्सिटी की वास्तविक नियामकीय स्थिति से अनजान रखा गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनसे फीस वसूली गई।

WhatsApp चैट्स और दस्तावेजों के जरिए यह भी सामने आया कि करीब 70 डॉक्टरों को फर्जी नियुक्तियों के बदले भुगतान किया गया। इसके अलावा ईडी ने 13.10 करोड़ रुपये के विदेशी लेनदेन का खुलासा किया है, जो सिद्दीकी या उनके परिवार से जुड़े लोगों के माध्यम से विदेश भेजे गए। ईडी का कहना है कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य नियामकों, छात्रों और सरकारी एजेंसियों को धोखा देकर अवैध रूप से धन अर्जित करना और उसे विदेश भेजना था।