2 लाख करोड़ उर्वरक सब्सिडी डिजिटल, किसानों तक सीधा व पारदर्शी भुगतान
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₹2 लाख करोड़ उर्वरक सब्सिडी का पूर्ण डिजिटलीकरण, iFMS–PFMS एकीकरण से भुगतान में पारदर्शिता और गति।
ई-बिल पोर्टल से रियल-टाइम क्लेम ट्रैकिंग, देरी खत्म और साप्ताहिक सब्सिडी समय पर जारी।
एंड-टू-एंड डिजिटल मॉनिटरिंग से कच्चे माल से उत्पाद तक पूरी सप्लाई-चेन पर सीधी निगरानी।
दिल्ली/ भारत सरकार ने नए साल 2026 के पहले ही दिन एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए लगभग ₹2 लाख करोड़ की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। इस फैसले से उर्वरक कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, सहकारी संस्थाओं और अंततः देश के करोड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। अब उर्वरक सब्सिडी का पूरा भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा, जिससे व्यवस्था पहले से कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगी। सरकार का उद्देश्य इस पहल के जरिए सब्सिडी वितरण में होने वाली देरी को खत्म करना, कागजी प्रक्रिया को कम करना और पूरे वित्तीय लेन-देन को तकनीक आधारित निगरानी के दायरे में लाना है। यह कदम न केवल डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती देता है, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली के कर्तव्य भवन से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस डिजिटल मुहिम का शुभारंभ किया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया और विकसित भारत लक्ष्यों की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि पूरी आपूर्ति-श्रृंखला के डिजिटल होने से कंपनियों और किसानों, दोनों को सुगमता मिलेगी।
उर्वरक सचिव श्री रजत कुमार मिश्र ने स्पष्ट किया कि यह केवल कागजी बिल हटाने का प्रयास नहीं है, बल्कि एक एंड-टू-एंड डिजिटल इकोसिस्टम है। नई बिलिंग व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के जरिए कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक की पूरी प्रक्रिया एक ही प्लेटफॉर्म पर दिखेगी और हर स्तर पर मॉनिटर की जा सकेगी।
विभाग ने सभी पीएसयू, सहकारी और निजी उर्वरक कंपनियों के वित्तीय लेन-देन को iFMS के माध्यम से वित्त मंत्रालय के PFMS से जोड़ दिया है। मुख्य लेखा नियंत्रक (CCA) श्री संतोष कुमार ने इसे iFMS–PFMS के बीच विशिष्ट तकनीकी साझेदारी का परिणाम बताया, जिससे सभी भुगतान पूर्णतः डिजिटल होंगे और वरिष्ठ अधिकारी रियल-टाइम निगरानी कर सकेंगे।
संयुक्त सचिव (F&A) श्री मनोज सेठी के अनुसार, नई प्रणाली से सब्सिडी भुगतान में देरी समाप्त होगी। ई-बिल पोर्टल के जरिए कंपनियां ऑनलाइन क्लेम दाखिल कर सकेंगी और भुगतान की स्थिति रियल-टाइम में देख पाएंगी, जिससे कार्यालयों के चक्कर और कागजी कार्यवाही कम होगी। यह पहल सब्सिडी वितरण को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाकर उर्वरक उद्योग व किसानों दोनों के लिए भरोसेमंद डिजिटल आधार तैयार करती है।