Seed Act 2026: QR कोड, 30 लाख जुर्माना
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Seed Act 2026 से हर बीज पर QR कोड और ट्रेसिबिलिटी लागू, नकली और घटिया बीजों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित।
नए सीड कानून में 30 लाख तक जुर्माना और जेल का प्रावधान, किसानों को धोखा देने वालों पर कड़ा प्रहार।
परंपरागत बीजों पर कोई रोक नहीं, ICAR और देसी कंपनियों को बढ़ावा देकर किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होंगे।
Madhya Pradesh/ मीडिया से बातचीत में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नया सीड एक्ट 1966 के पुराने कानून की जगह लेगा, जो आज की तकनीक और कृषि जरूरतों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि Seed Act 2026 किसानों के अधिकारों की रक्षा करते हुए बीज कंपनियों और विक्रेताओं को जवाबदेह बनाएगा।
मंत्री ने बताया कि नए कानून के तहत हर बीज की ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बीज पैकेट पर QR कोड होगा, जिसे स्कैन कर किसान यह जान सकेंगे कि बीज कहां उत्पादित हुआ, किस कंपनी और डीलर से होकर आया और किसने उसे बेचा। इससे नकली और घटिया बीजों की पहचान तुरंत संभव होगी और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि ट्रेसिबिलिटी लागू होने के बाद खराब बीज बाजार में आएंगे ही नहीं और यदि आए भी तो जिम्मेदार व्यक्ति या कंपनी पर कड़ी कार्रवाई होगी। किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले डीलरों और कंपनियों की मनमानी पर इससे प्रभावी अंकुश लगेगा।
सीड कंपनियों का अनिवार्य पंजीकरण
श्री चौहान ने बताया कि अब हर बीज कंपनी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि कौन सी कंपनी अधिकृत है और कौन नहीं। बिना पंजीकरण कोई भी कंपनी या विक्रेता बीज नहीं बेच सकेगा। इससे बाजार में फर्जी कंपनियों और अवैध कारोबार पर रोक लगेगी।
परंपरागत बीजों पर कोई रोक नहीं
कृषि मंत्री ने यह भ्रम भी दूर किया कि नया कानून किसानों के परंपरागत बीजों पर पाबंदी लगाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अपने बीज बो सकते हैं, दूसरे किसानों को दे सकते हैं और स्थानीय स्तर पर बीजों के आदान-प्रदान की परंपरा पहले की तरह जारी रहेगी। Seed Act 2026 का उद्देश्य केवल व्यावसायिक स्तर पर बिकने वाले बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
सख्त दंड का प्रावधान
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब घटिया या नकली बीज बेचने वालों को 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और गंभीर मामलों में तीन साल तक की जेल हो सकती है। पहले जहां जुर्माना केवल 500 रुपये तक सीमित था, वहीं अब सजा को प्रभावी बनाया गया है ताकि किसान को वास्तविक न्याय मिल सके।
ICAR और देसी कंपनियों को बढ़ावा
मंत्री ने बताया कि नए कानून में सार्वजनिक क्षेत्र जैसे ICAR, कृषि विश्वविद्यालयों और KVKs की भूमिका को मजबूत किया गया है। इसके साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाले बीज बनाने वाली देसी कंपनियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। विदेशी बीजों के लिए कड़ा मूल्यांकन और जांच प्रक्रिया अनिवार्य होगी, ताकि भारतीय कृषि और किसानों के हित सुरक्षित रहें।
किसान जागरूकता पर जोर
कृषि मंत्री ने स्वीकार किया कि किसानों में जागरूकता की कमी एक चुनौती है। इसे दूर करने के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को बीज चयन, गुणवत्ता जांच और शिकायत निवारण की जानकारी देंगे।
राज्यों के अधिकार सुरक्षित
उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि राज्य का विषय है और Seed Act 2026 से राज्यों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं होगी। कानून का क्रियान्वयन केंद्र और राज्यों के सहयोग से किया जाएगा।