Totapuri Mango News: किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की बड़ी योजना
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Totapuri Mango Farmers
तोतापुरी आम किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक सुधारों का रोडमैप तैयार किया।
आम आधारित पेयों में प्राकृतिक गूदे की मात्रा बढ़ाने और जीएसटी ढांचे की समीक्षा पर जोर दिया गया।
प्रोसेसिंग, निर्यात, मूल्य स्थिरीकरण और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
New Delhi / आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों को लगातार गिरती कीमतों और आय में कमी से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए तोतापुरी आम की खेती, प्रोसेसिंग, विपणन और निर्यात व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
यह बैठक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित थी। समिति का गठन 2 जुलाई 2026 को किया गया था और इसमें ICAR-CISH लखनऊ, ICAR-IIHR बेंगलुरु, डॉ. वाईएसआर उद्यानिकी विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश तथा राज्य उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे। समिति ने 8 से 10 जुलाई के बीच आंध्र प्रदेश के तिरुपति और चित्तूर जिलों का दौरा कर किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), मंडी प्रतिनिधियों, पल्प उद्योग, निर्यातकों और जिला प्रशासन से बातचीत कर पूरी मूल्य श्रृंखला का अध्ययन किया।
समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि इस वर्ष तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारणों में प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा समय पर खरीद न होना, बाजार में समन्वय की कमी, वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव और आम आधारित पेयों में प्राकृतिक आम गूदे का कम उपयोग शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार जब किसानों की बड़ी मात्रा में उपज एक साथ मंडियों और फैक्ट्रियों तक पहुंचती है और खरीद समय पर नहीं होती, तब कीमतों में अचानक भारी गिरावट आ जाती है।
बैठक में समिति ने सुझाव दिया कि आम आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत प्राकृतिक आम गूदा अनिवार्य किया जाए। साथ ही जिन पेयों में निर्धारित मात्रा से अधिक गूदा हो, उन्हें 5 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में रखा जाए, जबकि कम गूदे वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाया जाए। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री ने एफएसएसएआई, जीएसटी परिषद, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।
शिवराज सिंह चौहान ने तोतापुरी आम के लिए केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति गठित करने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया। यह समिति हर वर्ष आम सीजन से पहले उत्पादन, बाजार की मांग, प्रसंस्करण क्षमता और कृषि लागत का आकलन कर किसानों के लिए लाभकारी संकेतात्मक खरीद मूल्य तय करने में मदद करेगी।
बैठक में यह भी सामने आया कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों के कई आम के बाग पुराने हो चुके हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए टॉप-वर्किंग तकनीक अपनाकर नीलम, अल्फांसो, हिम्मायत और बंगनपल्ली जैसी उच्च मूल्य वाली किस्मों की कलम लगाने की सिफारिश की गई। इसके अलावा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण, प्रदर्शन उद्यान और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
फल की गुणवत्ता सुधारने के लिए शुरुआती चरण में लगभग 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट बैग उपलब्ध कराने तथा क्षेत्रीय खरीद और प्रारंभिक प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया। आंध्र प्रदेश सरकार को यह भी सिफारिश की गई कि सभी पंजीकृत प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 15 मई से खरीद और पल्प निर्माण शुरू करना अनिवार्य किया जाए।
बैठक में किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना, आम के बीज से "मैंगो बटर" और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने तथा APEDA के सहयोग से समुद्री मार्ग के जरिए निर्यात बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें, ICAR, APEDA, किसान उत्पादक संगठन और प्रसंस्करण उद्योग मिलकर एक समन्वित रोडमैप तैयार करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सुधारों के लागू होने से तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और भारतीय आम की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी।