MGAHV: राष्ट्रीय युवा दिवस पर डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को बताया प्रासंगिक

Wed 14-Jan-2026,02:59 AM IST +05:30

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MGAHV: राष्ट्रीय युवा दिवस पर डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को बताया प्रासंगिक राष्ट्रीय-युवा-दिवस-पर-विशेष-कार्यक्रम
  • राष्ट्रीय युवा दिवस पर हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने स्वामी विवेकानंद के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

  • कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद व पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमाओं पर पुष्पहार अर्पण के साथ हुई।

  • व्याख्यान में भारतीय दर्शन, अद्वैत वेदांत और राष्ट्रनिर्माण में शिक्षा की भूमिका पर गहन चर्चा की गई।

Maharashtra / Wardha :

वर्धा/ महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में सोमवार, 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर एक विशेष वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय “स्वामी विवेकानंद का जीवन एवं उनके विचार” रहा। इस आयोजन में मुख्य प्रस्तावक एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने स्वामी विवेकानंद के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिर्माण की भावना को सशक्त करना था।

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय की भूमिका केंद्रीय रही। कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. पाण्डेय ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के प्रांगण में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पण कर विधिवत शुरुआत की गई। इस अवसर पर विवेकानंद के अमर संदेश “उठो और जागो” को स्मरण करते हुए युवाओं को आत्मबल, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित किया गया।

इसके पश्चात दूरशिक्षा निदेशालय परिसर में पं. मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद और पं. मदन मोहन मालवीय दोनों ही भारत की वैचारिक और शैक्षिक परंपरा के ऐसे स्तंभ हैं, जिन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का आधार बनाया।

मुख्य प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए डॉ. कृष्ण चंद पाण्डेय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का चिंतन केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक पुनर्जागरण की मजबूत नींव है। उन्होंने विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, अद्वैत वेदांत और भारतीय दर्शन की परंपरा पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज के युवाओं के भीतर आत्मविश्वास, कर्तव्यबोध और सेवा-भाव जागृत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम में विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के सेवानिवृत्त प्रो. रामेश्वर मिश्र ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय साधना को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर भारत की दार्शनिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से दुनिया को परिचित कराया। शिकागो में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारत को आध्यात्मिक नेतृत्व की पहचान दिलाई।

इस अवसर पर साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि स्वामी विवेकानंद धर्म को जीवन का पर्याय मानते थे। उनका जोर चरित्रवान, श्रद्धावान और कर्मशील मनुष्य के निर्माण पर था। उन्होंने युवाओं से विवेकानंद के विचारों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में डॉ. रवि कुमार, डॉ. श्रीनिकेतन कुमार मिश्र, डॉ. शैलेश मरजी कदम, डॉ. दीप, डॉ. कोमल कुमार परदेशी, डॉ. राम कृपाल, डॉ. आदित्य चतुर्वेदी, बी. एस. मिरगे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आरंभ कुलगीत से और समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। यह आयोजन युवाओं के वैचारिक निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व के बोध का सशक्त मंच सिद्ध हुआ।