कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने ध्वजारोहण से किया। इसके साथ ही शहनाई वादन और कुलगीत के माध्यम से स्थापना दिवस का भव्य आरंभ हुआ। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के साथ-साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी ऑनलाइन माध्यम से संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी और स्वावलंबन के साथ-साथ भाषा को समृद्ध बनाना जरूरी है और विश्वविद्यालय ने पिछले 29 वर्षों में हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उल्लेख करते हुए वर्धा और नागपुर को हिंदी के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने संबोधन में कहा कि यह केवल एक विश्वविद्यालय का नहीं बल्कि हिंदी भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और गांधी के विचारों का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और संस्कृति के माध्यम से ही राष्ट्र को आत्मनिर्भर और विकसित बनाया जा सकता है। भविष्य में हिंदी डिजिटल माध्यम में भी एक प्रमुख भाषा बनेगी। उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों को हिंदी में बोलने, सोचने और सृजन करने के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कार्यपरिषद के सदस्य एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के उपाध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र दुबे ने कालिदास, महात्मा गांधी और विनोबा भावे के विचारों का स्मरण करते हुए विश्वविद्यालय की नींव और उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें साहित्य, कला और शिल्प से जुड़े पाठ्यक्रमों के संचालन की योजना है।
कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय 1997 में स्थापित हुआ और 2002 में शैक्षणिक गतिविधियां प्रारंभ हुईं। शुरू में मात्र 36 विद्यार्थियों से शुरू हुआ यह संस्थान अब आठ विद्यापीठों और 27 विभागों के माध्यम से लगभग एक हजार से अधिक छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय, अकादमिक संरचना और डिजिटल पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक, अधिकारी और छात्रों के सामूहिक प्रयास से ही कोई विश्वविद्यालय उच्च शिखर छू सकता है। उन्होंने भारतीय परंपरागत ज्ञान पर विश्वकोष बनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय कैलेंडर का लोकार्पण, जनसंचार विभाग द्वारा निर्मित ‘मीडिया समय’ का प्रकाशन और ‘वर्धा दर्शन’ का प्रदर्शन भी किया गया। समारोह का संचालन प्रदर्शनकारी कला विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश भारती ने किया। कुलसचिव क़ादर नवाज खान ने कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी को आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। स्थापना दिवस ने महात्मा गांधी के विचारों और हिंदी भाषा के महत्व को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि संस्कृति, ज्ञान और नवाचार के माध्यम से ‘विकसित भारत’ की दिशा में निरंतर योगदान दे रहा है।