रामपुर–नयागांव में जल प्रदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण, स्वच्छ और सुरक्षित पानी पर जोर

Wed 07-Jan-2026,07:06 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

रामपुर–नयागांव में जल प्रदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण, स्वच्छ और सुरक्षित पानी पर जोर Jabalpur-News
  • रामपुर–नयागांव जल प्रदाय प्रणाली का निरीक्षण.

  • नर्मदा जैकवेल और जल शोधन संयंत्र की जांच.

  • स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पर विशेष जोर.

Madhya Pradesh / Jabalpur :

Jabalpur / 7 जनवरी। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन एवं प्रशासन) राजीव गुप्ता ने मंगलवार को रामपुर और नयागांव क्षेत्र की जल प्रदाय व्यवस्था का विस्तृत और गहन निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पावर मैनेजमेंट कंपनी के आवासीय परिसरों और विद्युत कंपनियों के कार्यालयों में पहुंचने वाला पानी पूरी तरह स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषणमुक्त हो।

निरीक्षण के दौरान राजीव गुप्ता ने जल स्रोत से लेकर वितरण प्रणाली तक हर स्तर की बारीकी से जांच की। उनके साथ अतिरिक्त मुख्य महाप्रबंधक अनुराग नायक, अधीक्षण अभियंता (सिविल मुख्यालय) धर्मेन्द्र वर्मा और सहायक अभियंता (जल प्रदाय) जितेन्द्र मोरे भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जल प्रदाय से जुड़े तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ स्वच्छता और रखरखाव की स्थिति का भी जायजा लिया।

पावर मैनेजमेंट कंपनी के जल प्रदाय उपसंभाग द्वारा रामपुर और नयागांव स्थित आवासीय परिसरों के लगभग 800 आवासों, शक्तिभवन तथा विभिन्न विद्युत कंपनियों के कार्यालयों में प्रतिदिन जल आपूर्ति की जाती है। इस व्यवस्था से करीब 10 हजार लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे इसकी जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

नर्मदा नदी से शुरू हुआ निरीक्षण
निरीक्षण की शुरुआत नर्मदा नदी के किनारे स्थित जैकवेल से की गई। अधिकारियों को बताया गया कि लगभग 45 वर्ष पूर्व तत्कालीन विद्युत मंडल के समय नर्मदा नदी में जैकवेल स्थापित किया गया था। यहां से पानी लिफ्ट कर करीब 2.10 किलोमीटर लंबी, 300 एमएम व्यास की पाइप लाइन के माध्यम से नयागांव स्थित जल शोधन संयंत्र तक लाया जाता है। इस प्रणाली की क्षमता 1 एमजीडी (MGD) है।

जल शोधन संयंत्र की कार्यप्रणाली का अवलोकन
इसके बाद नयागांव स्थित जल शोधन संयंत्र का निरीक्षण किया गया। यहां पानी को विभिन्न चरणों से शुद्ध किया जाता है। शुद्धिकरण के बाद पानी 25 लाख एमएलडी क्षमता के ओवरहेड टैंक में संग्रहित किया जाता है। इसके बाद 200 एमएम व्यास की दो पाइप लाइनों के जरिए पानी शक्तिभवन, सुपीरियर टाइप और गणेश मंदिर स्थित टंकियों में भेजा जाता है।

राजीव गुप्ता ने जल शोधन संयंत्र में स्थापित प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया, जहां प्रतिदिन पानी की गुणवत्ता की जांच की जाती है। उन्होंने निर्देश दिए कि पानी की जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और मानकों का सख्ती से पालन किया जाए।

आवासीय क्षेत्रों तक ऐसे पहुंचता है पानी
सुपीरियर टैंक क्रमांक-2, जिसकी क्षमता 1.5 लाख लीटर है, के माध्यम से विभिन्न आवासीय परिसर, हॉस्टल परिसर और शिलाकुंज हाउसिंग सोसायटी में जल प्रदाय किया जाता है। वहीं गणेश मंदिर स्थित पानी टंकी के टैंक क्रमांक-1 और टैंक क्रमांक-4 से समस्त आवासीय परिसर, बालक मंदिर स्कूल और कार्यालयों को पानी की आपूर्ति होती है।

डिस्ट्रीब्यूशन लाइन पर विशेष निर्देश
निरीक्षण के दौरान कार्यपालक निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी हालत में डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में लीकेज नहीं होना चाहिए। साथ ही पाइप लाइनों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने और नियमित निरीक्षण करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल की आपूर्ति केवल तकनीकी व्यवस्था से नहीं, बल्कि सतत निगरानी और जिम्मेदारी से ही संभव है।

राजीव गुप्ता ने अधिकारियों से कहा कि जल प्रदाय व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और सतर्कता सर्वोपरि होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल मिलता रहे।