Nepal Flood: नेपाल बाढ़ में मृतकों की संख्या 1,388 पहुंची, 5,130 लोग लापता
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Nepal Flood News
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 1,388 हुई, जबकि 5,130 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
चितवन में सबसे अधिक 364 शव बरामद हुए, जबकि आठ जिलों में लगातार खोज और बचाव अभियान जारी है।
अब तक 104 शवों की पहचान कर परिवारों को सौंपा गया, जबकि सुरक्षाबलों ने 13,728 लोगों को सुरक्षित बचाया है।
Kathmandu / नेपाल में 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य हिस्सों के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ प्रभावित आठ जिलों से लगातार शव बरामद होने के बाद रविवार को आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,388 हो गई। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और सुरक्षाबलों का संयुक्त खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, सबसे अधिक 364 शव चितवन जिले से बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व से 230, नवलपरासी पश्चिम से 222 और नुवाकोट से 199 शव मिले हैं। रसुवा में 185, गोरखा में 77, धाडिंग में 71 और तनहुं जिले में 38 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा दो लोगों की काठमांडू में इलाज के दौरान मौत हो गई।
बाढ़ और उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों ने राहत एवं बचाव कार्यों को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई इलाकों में संपर्क और आवागमन प्रभावित होने के कारण सुरक्षाकर्मियों को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रही हैं, ताकि लापता लोगों का पता लगाया जा सके और जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाई जा सके।
आंकड़ों के मुताबिक, अब तक बरामद 1,388 शवों में से केवल 104 की पहचान हो पाई है। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शवों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान अभी बाकी है, जिससे प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
अधिकारियों ने बताया कि अभी करीब 5,130 लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, बचाव अभियान के दौरान अब तक 13,728 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। संयुक्त सुरक्षा कमांड की टीमें लगातार खोज और बचाव अभियान में जुटी हैं।
स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में भी राहत, बचाव और शवों की पहचान का काम महत्वपूर्ण बना रहेगा। लापता लोगों की बड़ी संख्या और बरामद शवों की पहचान लंबित होने के कारण आपदा का वास्तविक मानवीय प्रभाव अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है।