प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह पारंपरिक सीमाओं से हटकर मलेशिया की संस्कृति, जीवनशैली और मूल्यों को कम समय में प्रस्तुत किया गया, वह अनुभव हमेशा स्मरणीय रहेगा। उन्होंने इस स्वागत को सच्ची मित्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इससे मित्रता की ऊंचाई और गहराई दोनों का वास्तविक अनुभव हुआ।
प्रधानमंत्री ने इसे अपना सौभाग्य बताया कि वे प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार मलेशिया आए हैं और प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के कार्यकाल में यह चौथी मुलाकात है। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ती सक्रियता, निरंतर संवाद और मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है। बीते वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों ने जिस गति और गहराई को हासिल किया है, वह प्रेरणादायक है और इसमें मलेशियाई नेतृत्व की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने बताया कि आज भारत और मलेशिया के बीच कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। स्किल डेवलपमेंट और कैपेसिटी बिल्डिंग में भी दोनों देश महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरे हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग में भी निरंतर प्रगति हो रही है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम है।
प्रधानमंत्री ने मलेशिया को आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई देते हुए विश्वास जताया कि मलेशिया के सहयोग से भारत–आसियान संबंध और अधिक गहरे तथा व्यापक होंगे।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत–मलेशिया संबंधों की असली ताकत ‘पीपल टू पीपल टाई’ है। भारतीय मूल के लगभग 30 लाख मलेशियाई नागरिक दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में प्रवासी भारतीय समुदाय से मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके मन में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के प्रति जो सम्मान और स्नेह है, उसे महसूस कर गर्व की अनुभूति हुई।
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को समय की आवश्यकता बताया और कहा कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत और मलेशिया जैसे समुद्री पड़ोसी देशों को अपने संबंधों की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी इस यात्रा का मूल संदेश यही है कि भारत, मलेशिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है।
अंत में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर भव्य और आत्मीय स्वागत के लिए मलेशियाई प्रधानमंत्री और उनकी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया।