भिंड में मिसाल बनी शादी
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भिंड जिले में शादी के दौरान वर पक्ष ने 51 लाख रुपये की लगुन राशि लौटाकर दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत सामाजिक संदेश दिया।
अच्छी नौकरी और आर्थिक स्थिति के बावजूद दहेज से इनकार कर परिवार ने संस्कार और सोच को प्राथमिकता दी।
Bhind/ भिंड शहर के खिड़किया मोहल्ला निवासी अनोज पाठक के बेटे आकर्ष पाठक का विवाह 5 फरवरी को जबलपुर निवासी विनोद उपाध्याय की बेटी अनिक्षा के साथ संपन्न हुआ। विवाह के दौरान लगुन-फलदान की रस्म में वधु पक्ष द्वारा परात में 51 लाख रुपये की राशि रखी गई थी।
लेकिन जैसे ही रस्म शुरू हुई, वर के पिता ने सभी को चौंकाते हुए स्पष्ट कर दिया कि वे इतनी बड़ी रकम स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें बहु नहीं, बल्कि बेटी चाहिए। इसके बाद पूरी लगुन राशि लौटा दी गई और परंपरा निभाने के लिए केवल 1 रुपया और नारियल स्वीकार किया गया।
परिवार का स्पष्ट संदेश
इस निर्णय ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। वर पक्ष ने बताया कि शिक्षा, संस्कार और आपसी सम्मान ही किसी विवाह की असली पूंजी हैं, न कि पैसे या संपत्ति। यह फैसला समाज में बेटियों के सम्मान और दहेज प्रथा के विरोध का प्रतीक बन गया।
दूल्हे की प्रोफाइल
दूल्हा आकर्ष पाठक वर्तमान में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित जिंदल स्टील कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। अच्छी नौकरी और आर्थिक स्थिति होने के बावजूद परिवार द्वारा दहेज न लेने का फैसला लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।
समाज में चर्चा का विषय
यह विवाह भिंड जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक शुरुआत बताया है।