भारत ने जैविक व पर्यावरण अनुकूल कपड़ों के उत्पादन व निर्यात को बढ़ावा दिया
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भारत जैव-आधारित और पर्यावरण अनुकूल कपड़ों के उत्पादन व निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई पायलट परियोजनाएं और योजनाएं लागू कर रहा है।
कृषि मंत्रालय की योजनाओं और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से जैविक कपास और रेशों का उत्पादन और वितरण बढ़ाया जा रहा है।
Delhi/ वस्त्र मंत्रालय ने आठ समूहों और चार फैशन हाउसों में 'भारत में परिधान फैशन आपूर्ति श्रृंखला से खतरनाक रसायनों को हटाने' के लिए पायलट परियोजना लागू की है। इसका उद्देश्य आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल रेशों के उत्पादन को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं में सतत फैशन के प्रति जागरूकता फैलाना है।
मंत्रालय ने ESG (Environment, Social, Governance) टास्क फोर्स भी गठित की है, जो सतत उत्पादन, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और निर्यात के मुद्दों पर विचार-विमर्श करती है। इसके तहत परिपत्र संवाद और क्लस्टर एक्सचेंज सिस्टम के माध्यम से उद्योग और निर्माता आपस में जानकारी साझा कर सकते हैं।
सरकार ने ICAR-CICR, NITRA जैसे संस्थानों के साथ मिलकर जैविक कपास उत्पादन, प्राकृतिक रंगों की किस्मों के बीज जारी करने और जैव-फाइबर की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई सहयोगात्मक पहल की हैं। राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता और 'मेगा क्लस्टर विकास कार्यक्रम' जैसे प्रयासों के माध्यम से प्राकृतिक रंगों और डाई हाउसेस की स्थापना को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इंडिया हैंडलूम ब्रांड (IHB) के तहत उच्च गुणवत्ता वाले पर्यावरण-अनुकूल हथकरघा उत्पादों का पंजीकरण और ब्रांडिंग की जा रही है। भारत टेक्स 2025 में जैविक रेशों और प्राकृतिक रंगों का प्रदर्शन कर उपयोगकर्ताओं में जागरूकता पैदा की गई।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की योजनाओं जैसे PKVY और MOVCDNER उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन सहायता के जरिए जैविक कपास और रेशों की मांग को बढ़ावा दे रहे हैं। ये सभी पहल भारत को जैविक और सतत फैशन उद्योग में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे लाने में सहायक होंगी।