फकीर मोहन विश्वविद्यालय दीक्षांत में राष्ट्रपति मुर्मु ने मातृभाषा व समावेशी शिक्षा पर दिया जोर

Tue 03-Feb-2026,06:10 PM IST +05:30

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फकीर मोहन विश्वविद्यालय दीक्षांत में राष्ट्रपति मुर्मु ने मातृभाषा व समावेशी शिक्षा पर दिया जोर President-Murmu-Fakir-Mohan-University-Convocation-2026
  • फकीर मोहन विश्वविद्यालय के अनुसंधान, सामाजिक सहभागिता और पर्यावरणीय कार्यक्रमों की राष्ट्रपति ने खुले मंच से सराहना की।

  • छात्रों से समाज सेवा, नैतिक नेतृत्व और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़कर भविष्य संवारने का आह्वान किया गया।

Delhi / New Delhi :

Odisha/ राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा के बालासोर में आयोजित फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बताया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के नए सभागार का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों से जुड़ा संदेश दिया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी कालजयी कहानी ‘रेवती’ ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने कहा कि 19वीं शताब्दी में एक आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाली लड़की का शिक्षा के लिए संघर्ष आज भी प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने स्वयं एक दूरस्थ जनजातीय क्षेत्र से शिक्षा की शुरुआत की और दृढ़ संकल्प के बल पर उच्च शिक्षा प्राप्त की।

राष्ट्रपति ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को अपने सामाजिक परिवेश, संस्कृति और परंपराओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है, जिससे छात्रों की सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे शास्त्र, पांडुलिपियाँ और साहित्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विज्ञान, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में भी अमूल्य ज्ञान प्रदान करते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस विरासत पर शोध कर आधुनिक समाज की समस्याओं का समाधान खोजें।

स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सफलता और सार्थकता में अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रसिद्धि और आर्थिक सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन को अर्थपूर्ण बनाना उससे भी अधिक आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में योगदान दें, क्योंकि समाज का विकास सामूहिक प्रयास से ही संभव है।

राष्ट्रपति ने फकीर मोहन विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान अकादमिक शिक्षा के साथ अनुसंधान, लोकसंपर्क और सामुदायिक विकास पर भी ध्यान देता है। उन्होंने ‘बैक टू स्कूल’, ‘कमाओ और सीखो’, पर्यावरण जागरूकता और समुद्र तट सफाई जैसे कार्यक्रमों को विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

उन्होंने बालासोर-भद्रक क्षेत्र की कृषि, मत्स्य और जैव विविधता से जुड़ी विशेषताओं का उल्लेख करते हुए नीले केकड़े और हॉर्सशू केकड़े पर अनुसंधान केंद्र की पहल को दूरदर्शी कदम बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय समावेशी विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।