ईरान में खामेनेई के खिलाफ उबाल, ट्रंप की कड़ी चेतावनी से बढ़ा तनाव
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी से ईरान संकट अब घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय टकराव का रूप लेता दिख रहा है।
62 मौतों के साथ बढ़ती हिंसा और दमन ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता और वैश्विक चिंता को और गहरा कर दिया है।
Iran/ ईरान में बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और गहराते आर्थिक संकट के बीच सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जनता का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। देशभर में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार और शासन व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं। प्रदर्शनकारी महंगाई, बेरोजगारी और जीवन-यापन की बदतर स्थिति के लिए सीधे तौर पर खामेनेई प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब इस आंतरिक संकट पर अमेरिका भी पैनी नजर बनाए हुए है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के हालात पर बेहद करीब से नजर रख रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान में प्रदर्शनकारी सुरक्षित रहेंगे, लेकिन साथ ही सख्त लहजे में चेतावनी भी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई, तो अमेरिका दखल देगा।
ट्रंप ने कहा कि ईरान “बड़ी मुसीबत” में है और वहां ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उनके मुताबिक कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों का प्रभाव बढ़ रहा है, जो सरकार के लिए गंभीर संकेत है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगर ईरानी सुरक्षा बल पहले की तरह गोलीबारी और दमन शुरू करते हैं, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हमला उसी जगह करेगा, जहां सबसे ज्यादा असर और “दर्द” होगा।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी सेना को ईरान की जमीन पर उतारा जाएगा। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका के पास ऐसे विकल्प हैं, जिनसे ईरानी नेतृत्व को कड़ा संदेश दिया जा सकता है। ट्रंप ने ईरानी नेताओं से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता न अपनाएं, क्योंकि हालात बेहद खतरनाक मोड़ पर हैं।
ईरान में बीते दो हफ्तों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन 7 जनवरी के बाद इनमें अचानक तेजी आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है। इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां, सुरक्षा बलों की सख्ती और बढ़ती हिंसा ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट यूं ही बढ़ता रहा, तो यह केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिम एशिया की स्थिरता पर भी गहरा असर डाल सकता है।