बुजुर्गों की संगति क्यों है इंसानियत और जीवन मूल्यों की सबसे बड़ी पाठशाला
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बुजुर्गों की संगति जीवन के अनुभव, नैतिक मूल्य और इंसानियत की समझ विकसित करती है, जो आधुनिक पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।
सामाजिक विशेषज्ञ मानते हैं कि बुजुर्गों से संवाद की कमी युवाओं में धैर्य, संवेदना और जीवन दृष्टि के अभाव को जन्म दे रही है।
बुजुर्गों के अनुभव सद्ग्रंथों की तरह होते हैं, जिनमें संघर्ष, सफलता और मानव मूल्यों की पीढ़ीगत सीख छिपी होती है।
Delhi / तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, डिजिटल संवाद और आत्मकेंद्रित सोच के इस दौर में समाज धीरे-धीरे अपनी सबसे मूल्यवान धरोहर—बुजुर्गों—से दूर होता जा रहा है। जबकि सच यह है कि बुजुर्गों की संगति केवल भावनात्मक सहारा नहीं, बल्कि पीढ़ियों का संचित ज्ञान है। कहा जाता है कि बुजुर्गों की एक-एक झुर्री में इंसानियत के वे अनुभव दर्ज होते हैं, जिन्हें विश्व रंगमंच पर अवतरित युग पुरुषों ने अपने सद्ग्रंथों के माध्यम से संजोया है।
समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बुजुर्ग जीवन की उन सच्चाइयों के साक्षी होते हैं, जिन्हें युवा वर्ग अक्सर अनुभवों की कमी के कारण समझ नहीं पाता। संघर्ष, धैर्य, त्याग, असफलता और पुनर्निर्माण—ये सभी मूल्य बुजुर्गों के जीवन का हिस्सा होते हैं। उनकी बातें केवल स्मृतियां नहीं, बल्कि समय की कसौटी पर परखी हुई सीख होती हैं।
आज संयुक्त परिवारों के टूटने और एकल जीवनशैली के बढ़ते चलन के कारण बुजुर्ग अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। सामाजिक संगठनों के अनुसार, बुजुर्गों से संवाद की कमी केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को भी नुकसान पहुंचा रही है। बुजुर्गों की संगति से युवा मानसिक संतुलन, नैतिक दृष्टिकोण और जीवन की व्यापक समझ विकसित कर सकते हैं।
शिक्षाविदों का कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में बुजुर्गों के अनुभवों को संवाद, कहानी और मार्गदर्शन के रूप में शामिल किया जाए, तो यह मूल्य-आधारित समाज की नींव को मजबूत कर सकता है। कई स्थानों पर ‘ग्रैंडपैरेंट्स काउंसलिंग’ और ‘अनुभव संवाद’ जैसे प्रयास सकारात्मक परिणाम दिखा रहे हैं।
बुजुर्ग केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी हैं। उनकी संगति हमें सिखाती है कि जीवन केवल सफलता की दौड़ नहीं, बल्कि इंसान बने रहने की यात्रा है। ऐसे में बुजुर्गों को समय देना, उनकी बात सुनना और उनसे सीखना—समाज के नैतिक पुनर्निर्माण की पहली शर्त बनता जा रहा है।