Stray Dogs | सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्ते और मवेशियों पर सुनवाई, सड़क सुरक्षा और समाधान पर जोर
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सड़क पर आवारा कुत्ते और मवेशियों से सुरक्षा खतरा.
NHAI और राज्य सरकारों की जवाबदेही पर सवाल.
नसबंदी, शेल्टर और जागरूकता अभियान जरूरी.
Delhi / सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों और सड़कों पर घूमते मवेशियों के मुद्दे पर जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच के सामने सुनवाई हुई। बेंच ने स्पष्ट किया कि आज हम दोनों पक्षों—समर्थकों और विरोधियों—की बात ध्यान से सुनेंगे और इसके लिए पर्याप्त समय रखा गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्थान में हाल ही में हुई दो गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का हवाला दिया, जिनमें न्यायाधीश गंभीर रूप से घायल हुए। कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 20 दिनों में ऐसे दो हादसे हुए हैं और इनमें से एक न्यायाधीश अभी भी रीढ़ की गंभीर चोट से जूझ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआई (NHAI) द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर सवाल उठाए। एनएचएआई ने बताया कि देश के लगभग 1400 किलोमीटर के संवेदनशील हाईवे हिस्सों में मवेशियों के सड़क पर आने की संभावना है। एनएचएआई ने कहा कि आगे की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, लेकिन कोर्ट ने तीखा सवाल किया कि क्यों एनएचएआई खुद इन संवेदनशील रास्तों की फेंसिंग नहीं करता और सड़क पर मवेशियों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे।
इस मामले में कोर्ट की मदद कर रहे एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने बताया कि पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने नवंबर 2025 में आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों की आबादी नियंत्रण के लिए SOP जारी किया था। हालांकि, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब जैसे कई राज्यों ने अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं किया है। राजस्थान और ओडिशा ने भी सहयोग नहीं किया। एमिकस क्यूरी ने बताया कि शेल्टर होम और नसबंदी (ABC) केंद्रों में पर्याप्त संसाधन और मानव शक्ति की कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि आबादी नियंत्रण के लिए पहले नर कुत्तों की नसबंदी की जाए।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर किसी सोसाइटी के बहुमत कुत्तों को हटाना चाहता है तो इसका सम्मान होना चाहिए। कुछ लोग कहते हैं कि वे सोसाइटी में भैंस रखना चाहते हैं। इस पर वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने कुत्ते प्रेमियों का बचाव किया। कोर्ट ने पूछा कि कुत्तों की बात की जा रही है, लेकिन मुर्गियों और बकरियों के बारे में क्या? सिबल ने जवाब दिया कि इसी कारण उन्होंने मुर्गियां खाना छोड़ दी हैं और आज तक किसी कुत्ते ने उन्हें नहीं काटा।
एमिकस क्यूरी ने कई राज्यों की तैयारियों पर नाराज़गी जताई और महाराष्ट्र के आंकड़े पेश किए, जहां आवारा कुत्तों की संख्या 1 लाख से अधिक है। उन्होंने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर शेल्टर बनाना और नसबंदी करना अनिवार्य है। इंदौर हाई कोर्ट में दायर PIL के बाद एबीसी रूल्स लागू करने का आदेश मिला, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
वंदना जैन ने कहा कि वह कुत्तों से प्यार करती हैं, लेकिन इंसानों से भी। उन्होंने बताया कि कुत्तों की सही संख्या का डेटा उपलब्ध नहीं है और आम लोगों में जागरूकता की कमी है। लोग यह भी नहीं जानते कि आवारा कुत्तों की शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर क्या है। कुत्तों की आबादी इसलिए नियंत्रित नहीं हो रही क्योंकि अधिकांश जगह नसबंदी के बजाय मारने पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि विदेशी और महंगे कुत्तों पर लग्जरी टैक्स लगाया जाए, देशी कुत्तों को अपनाने को बढ़ावा दिया जाए और किसानों को अपने खेतों की सुरक्षा के लिए कुत्ते रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ डॉग बाइट की नहीं है। कुत्ते वाहन चालकों के लिए खतरा बनते हैं, खासकर दोपहिया वाहनों और साइकिलों के लिए। सड़कों पर दौड़ते कुत्तों से दुर्घटनाएं हो सकती हैं। कपिल सिबल ने कहा कि सभी कुत्ते एक जैसे नहीं होते और हम उन्हें मारकर समस्या हल नहीं कर सकते। उनका सुझाव था कि कुत्तों को पकड़कर, नसबंदी और टीका लगाकर, फिर वापस छोड़ने का मॉडल अपनाया जाए। कई जगह यह तरीका सफल भी रहा है। बीमार कुत्तों को बंद करने से खतरा और बढ़ सकता है।
अभिषेक कुसुम गुप्ता ने कहा कि उनकी सोसाइटी उनकी प्रॉपर्टी है और उन्हें फैसले का हक मिलना चाहिए। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की स्थिति सबसे खराब है, और उनकी बेटी को सात–आठ कुत्तों ने काटा था। जस्टिस जे. नाथ ने कहा कि अदालत इन घटनाओं से वाकिफ है और ठोस समाधान चाहती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। अदालत ने सभी पक्षों को संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकालने का निर्देश दिया, जिससे न तो मानव सुरक्षा खतरे में हो और न ही पशुओं का हक चोट पहुंचे।