गांधी आश्रम में उपराष्ट्रपति का संदेश

Tue 20-Jan-2026,06:11 PM IST +05:30

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गांधी आश्रम में उपराष्ट्रपति का संदेश Vice-President-Gandhi-Ashram-Harijan-Sevak-Sangh-Meeting
  • हरिजन सेवक संघ की भूमिका को छुआछूत उन्मूलन और चरित्र निर्माण में ऐतिहासिक योगदान के रूप में रेखांकित किया गया।

  • गांधी आश्रम में महादेव देसाई लाइब्रेरी विस्तार को उपराष्ट्रपति ने सामाजिक बदलाव और ज्ञान के सशक्त माध्यम के रूप में बताया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi/ नई दिल्ली के गांधी आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि महादेव देसाई लाइब्रेरी एक्सटेंशन केवल एक भवन विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के विस्तार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ज्ञान समाज को बदलने का सबसे टिकाऊ माध्यम है और पुस्तकालय इस परिवर्तन के केंद्र होते हैं।

उपराष्ट्रपति ने आश्रम परिसर स्थित कस्तूरबा म्यूजियम का भी दौरा किया, जहां महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी 1930–40 के दशक में दिल्ली प्रवास के दौरान ठहरे थे। उन्होंने कस्तूरबा बा द्वारा उपयोग किए गए सादे घर और रसोई को देखकर भावुक प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि यह स्थान भारत के नेताओं के सादे जीवन, त्याग और दृढ़ संकल्प की जीवंत मिसाल है।

महात्मा गांधी के जीवन में आए परिवर्तन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने मदुरै रेलवे स्टेशन की घटना को याद किया, जब किसानों की गरीबी देखकर गांधीजी ने पश्चिमी वस्त्र त्यागने और धोती धारण करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव आम जनता से जुड़ने और उनके उत्थान के लिए गांधीजी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

स्वदेशी आंदोलन पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि गांधीजी ने भारत की कपास को इंग्लैंड में प्रोसेस कर भारत में बेचने की व्यवस्था का विरोध किया और आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी को अपनाने पर जोर दिया।

हरिजन सेवक संघ को गांधीजी द्वारा बोया गया एक विचारात्मक बीज बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस संस्था ने शिक्षा और सेवा के माध्यम से छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान जन्म से नहीं बल्कि उसके चरित्र से होती है।

पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायणन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हरिजन सेवक संघ ने उनकी शिक्षा में सहयोग कर एक महान राष्ट्रसेवक को गढ़ने में योगदान दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि संघ भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्व तैयार करता रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान “Age of Enlightenment: Mahatma Gandhi’s Vision” पुस्तक का विमोचन किया गया। उपराष्ट्रपति ने महात्मा गांधी, ठक्कर बापा और विनोबा भावे को पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।