छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: पहली पत्नी की संतान को संपत्ति का कानूनी अधिकार

Mon 16-Feb-2026,05:29 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: पहली पत्नी की संतान को संपत्ति का कानूनी अधिकार Chhattisgarh-High-Court-First-Wife-Property-Rights
  • पहले विवाह के दौरान दूसरी शादी केवल रस्म या चूड़ी प्रथा से वैध नहीं मानी जाएगी।

  • संपत्ति और उत्तराधिकार का निर्धारण केवल कानून और अदालत के आदेश से होगा।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक कानून और उत्तराधिकार से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पहले विवाह के दौरान केवल चूड़ी प्रथा या रस्म द्वारा की गई दूसरी शादी कानूनन मान्य नहीं होगी। न्यायालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी या उसकी संतान का संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा। हाईकोर्ट ने इस निर्णय में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 का हवाला देते हुए विवाह और उत्तराधिकार के मौलिक सिद्धांतों को स्पष्ट किया।

मामला दुर्ग जिले के सगनूराम की संपत्ति से जुड़ा था। विवाद पहली पत्नी की बेटी सूरज बाई और दूसरी कथित पत्नी ग्वालिन बाई की बेटियों के बीच संपत्ति के अधिकार को लेकर उत्पन्न हुआ था। सुनवाई में पता चला कि ग्वालिन बाई के साथ चूड़ी विवाह का समय पहला पति जीवित था और किसी प्रकार का कानूनी तलाक या मृत्यु प्रमाणित नहीं था। अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय तक साथ रहने या रस्म निभाने से विवाह वैध नहीं बनता।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पटवारी या राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होना कानूनी वारिस होने का प्रमाण नहीं है। उत्तराधिकार का निर्धारण केवल कानून और न्यायालय के आदेशों के अनुसार किया जाता है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सगनूराम की संपत्ति पर अधिकार केवल पहली पत्नी की संतान का होगा।