मिलन 2026 में मिलन विलेज का भव्य उद्घाटन
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विशाखापत्तनम में आयोजित अभ्यास में समुद्री सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी युद्धाभ्यास और सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता पर विशेष जोर दिया गया है।
भारतीय नौसेना का यह आयोजन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था और वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विशाखापत्तनम/ भारतीय नौसेना ने अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन 2026 के अंतर्गत पूर्वी नौसेना कमान में “मिलन विलेज” का औपचारिक अनावरण किया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने की। इस अवसर पर मित्र देशों की नौसेनाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वैश्विक समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित की गई अत्याधुनिक सुविधाओं का निरीक्षण भी किया गया।
मिलन विलेज को गहन विचार-विमर्श के बाद एक विशिष्ट सांस्कृतिक और संवाद मंच के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य 70 से अधिक देशों के नौसैनिक प्रतिनिधियों और अधिकारियों को सौहार्द, भाईचारे और सहयोग के वातावरण में एक साथ लाना है। यह मंच पेशेवर सीमाओं से आगे बढ़कर सामाजिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव को सशक्त बनाने का कार्य करेगा।
मिलन विलेज की प्रमुख विशेषता सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर विशेष जोर है। यहां भारत की विविधतापूर्ण विरासत, पारंपरिक लोक नृत्य, संगीत प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न राज्यों की कला और लोक परंपराओं की जीवंत झलक विदेशी प्रतिनिधियों को भारतीय संस्कृति की समृद्धि से परिचित कराएगी।
इसके अतिरिक्त, परिसर में नौसेना से जुड़े स्मृति चिन्हों के स्टॉल, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। आगंतुकों के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों का विशेष प्रबंध किया गया है, जिससे वे भारत की सांस्कृतिक विविधता का स्वाद भी ले सकें।
अपने संबोधन में वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने कहा कि मिलन विलेज केवल एक सांस्कृतिक स्थल नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और सहयोग को सुदृढ़ करने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (IFR) 2026 और आयन्स कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स के साथ यह आयोजन भारत की बढ़ती समुद्री पहुंच और वैश्विक साझेदारी का प्रतीक है।
15 से 25 फरवरी 2026 तक चलने वाले मिलन 2026 में बंदरगाह और समुद्री चरणों के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्धाभ्यास, वायु रक्षा अभ्यास, खोज एवं बचाव अभियान तथा अन्य जटिल समुद्री परिचालन शामिल होंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बहुपक्षीय अभ्यासों में से एक यह आयोजन समुद्री सुरक्षा, सामूहिक प्रतिक्रिया क्षमता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा। मिलन विलेज “भाईचारा, सहयोग और सहभागिता” की भावना को साकार रूप देता है और भारत की समुद्री कूटनीति को नई ऊंचाई प्रदान करता है।