DFS रिपोर्ट: UPI-Rupay से डिजिटल भुगतान में 11 गुना उछाल
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सर्वेक्षण के अनुसार 90% उपयोगकर्ताओं का डिजिटल भुगतान पर भरोसा बढ़ा, 94% व्यापारियों ने यूपीआई अपनाया और बिक्री में सुधार दर्ज किया।
8,276 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता से डिजिटल अवसंरचना मजबूत, यूपीआई की कुल लेनदेन हिस्सेदारी 80% तक पहुंची।
New Delhi/ वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने 13-14 फरवरी 2026 को आयोजित चिंतन शिविर में “रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम-यूपीआई (व्यक्ति-से-व्यापारी) लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव विश्लेषण” शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। यह अध्ययन National Payments Corporation of India के परामर्श से एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष एजेंसी द्वारा किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से लागू प्रोत्साहन योजना ने डिजिटल भुगतान के सार्वभौमिक उपयोग, नकदी पर निर्भरता में कमी और आर्थिक गतिविधियों के औपचारिककरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने इस योजना के तहत अधिग्रहण करने वाले बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को संरचित बजटीय सहायता प्रदान की।
अध्ययन 15 राज्यों के 10,378 उत्तरदाताओं पर आधारित है, जिनमें उपयोगकर्ता, व्यापारी और सेवा प्रदाता शामिल थे। सर्वेक्षण में पाया गया कि यूपीआई 57% उपयोगकर्ताओं के बीच सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बन चुका है, जबकि नकद लेनदेन 38% पर सिमट गया है। 65% यूपीआई उपयोगकर्ता प्रतिदिन कई डिजिटल लेनदेन करते हैं, और 18-25 आयु वर्ग में इसका उपयोग 66% तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट बताती है कि 90% उपयोगकर्ताओं का डिजिटल भुगतान पर भरोसा बढ़ा है। 74% लोगों ने भुगतान की गति को प्रमुख लाभ बताया, जबकि 52% ने कैशबैक को प्रेरक कारक माना। व्यापारियों में 94% ने यूपीआई अपनाया और 57% ने बिक्री में वृद्धि दर्ज की।
डिजिटल भुगतान अवसंरचना में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। कुल डिजिटल लेनदेन में लगभग 11 गुना बढ़ोतरी हुई है और यूपीआई की हिस्सेदारी 80% तक पहुंच गई है। यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गई। यूपीआई प्लेटफॉर्म पर कार्यरत बैंकों की संख्या 216 से बढ़कर 661 हो गई।
सरकार ने योजना के तहत कुल 8,276 करोड़ रुपये का बजटीय समर्थन दिया, जिससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को कम मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में मदद मिली। रिपोर्ट में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रुपे कार्ड के उपयोग को और मजबूत करने की सिफारिश की गई है। डीएफएस का मानना है कि यह योजना डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को सशक्त कर आर्थिक विकास, पारदर्शिता और वित्तीय समावेशन को नई गति दे रही है।