Gaganyaan Mission: 2026 में पहला मानवरहित मिशन, 2027 तक अंतरिक्ष में जाएगा पहला भारतीय दल
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Gaganyaan Mission 2026
2026 में व्योममित्र के साथ पहला मानवरहित गगनयान मिशन प्रस्तावित।
2027 तक भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन भेजने का लक्ष्य।
इसरो ने मानव अंतरिक्ष उड़ान की प्रमुख तकनीकों का सफल परीक्षण पूरा किया।
New Delhi / भारत का महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी कि मिशन के तहत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक अधिकांश महत्वपूर्ण प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इससे भारत के पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
डॉ. सिंह ने बताया कि मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM-3) के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं की ग्राउंड टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की प्रणोदन प्रणालियों का विकास और परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS), तापीय सुरक्षा प्रणाली, मंदन प्रणाली, क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग प्रणाली तथा अत्याधुनिक एवियोनिक्स का भी सफल परीक्षण किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के सभी पांच प्रकार के मोटरों का विकास और स्थिर परीक्षण पूरा हो चुका है। इसके अलावा ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र, क्रू परीक्षण सुविधा तथा दूसरे लॉन्च पैड पर आवश्यक अवसंरचना तैयार कर ली गई है। टीवी-डी1 मिशन के माध्यम से उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम का सफल सत्यापन किया जा चुका है, जबकि इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-01 और 02 के जरिए डीसेलरेशन सिस्टम की क्षमता भी प्रमाणित हुई है। अब टीवी-डी2 मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र (हाफ-ह्यूमनॉइड) को लेकर पहला मानवरहित गगनयान मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद 2027 तक दो और मानवरहित मिशन संचालित किए जाएंगे, जिनके सफल होने के बाद भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को स्थापित करना है। इसरो पांच मॉड्यूल वाले अंतरिक्ष स्टेशन की रूपरेखा तैयार कर चुका है और पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास एवं प्रक्षेपण को मंजूरी मिल चुकी है। विभिन्न इसरो केंद्रों में इससे जुड़ी तकनीकी गतिविधियां तेजी से चल रही हैं।
मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने सितंबर 2024 में 20,193 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी (ASA), फ्रांस की CNES और रूस की रोस्कोस्मोस जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग भी जारी है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गगनयान मिशन की मौजूदा प्रगति भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों तथा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की नींव और मजबूत होगी।