अशोक चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अंतरिक्ष तक पहुंची भारतीय वीरता

Mon 26-Jan-2026,11:38 AM IST +05:30

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अशोक चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अंतरिक्ष तक पहुंची भारतीय वीरता Shubhanshu Shukla Ashoka Chakra Award
  • ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मान.

  • भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री जिन्हें शांति कालीन वीरता पुरस्कार मिला.

  • गगनयान मिशन और IAF से अंतरिक्ष तक की प्रेरणादायक यात्रा.

Delhi / Delhi :

Delhi / गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता सम्मान अशोक चक्र से नवाजा गया। यह सम्मान न सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि है, बल्कि भारत के बदलते साहस, विज्ञान और अंतरिक्ष सपनों का प्रतीक भी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इस बहादुर भारतीय वायुसेना अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री के लिए अशोक चक्र को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही शुभांशु शुक्ला भारत के पहले ऐसे अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं, जिन्हें यह प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार मिला है।

शुभांशु शुक्ला की कहानी यह साबित करती है कि बहादुरी केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाइयों तक भी पहुंच सकती है। लखनऊ के एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरिक्ष यान के कंट्रोल तक पहुंचने का उनका सफर आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है। खास बात यह है कि उन्होंने राकेश शर्मा की ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान के 41 साल बाद भारत के अंतरिक्ष मानव मिशन के सपने को नई दिशा दी है।

शुभांशु शुक्ला का बचपन से ही आसमान से गहरा रिश्ता रहा। मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने अपने जीवन का सबसे साहसिक फैसला लिया। कारगिल युद्ध और भारतीय वायुसेना के एयर शो से प्रेरित होकर उन्होंने बिना अपने माता-पिता को बताए, एक दोस्त के फॉर्म का इस्तेमाल कर नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के लिए आवेदन कर दिया। यही फैसला उनके जीवन की दिशा तय करने वाला साबित हुआ।

साल 2006 में शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना में एक फाइटर पायलट के रूप में शामिल हुए। अपने करियर के दौरान उन्होंने Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों पर 2,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी। उनकी उड़ान सिर्फ अनुभव तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने खुद को एक टेस्ट पायलट और कॉम्बैट लीडर के रूप में भी साबित किया।

तकनीकी ज्ञान को और मजबूत करने के लिए शुभांशु ने IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। यही नहीं, उनकी काबिलियत और अनुशासन ने उन्हें भारत के सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन गगनयान तक पहुंचा दिया। साल 2019 में ISRO ने उन्हें गगनयान मिशन के लिए चुना। इसके बाद उन्होंने रूस के यूरी गगारिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कठोर प्रशिक्षण लिया और साथ ही NASA और ISRO के संयुक्त सत्रों में भी भाग लिया।

शुभांशु शुक्ला को गगनयान कार्यक्रम के लिए चुने गए चार फाइनल उम्मीदवारों में शामिल किया गया था, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। अंतरिक्ष में मानव सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए जिस साहस, मानसिक मजबूती और जोखिम उठाने की क्षमता की जरूरत होती है, शुभांशु शुक्ला उसमें पूरी तरह खरे उतरे।

अशोक चक्र से सम्मानित होना केवल उनकी स्किल या उपलब्धियों की पहचान नहीं है, बल्कि यह उस अदम्य साहस की स्वीकारोक्ति है, जो भारत को अंतरिक्ष के नए युग में ले जाने की ताकत रखता है। शुभांशु शुक्ला की उड़ान आज लाखों युवाओं को यह संदेश देती है कि सपने चाहे धरती से जुड़े हों या अंतरिक्ष से, अगर हिम्मत मजबूत हो तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं।