ज्ञानरंजन का निधन: हिंदी साहित्य का प्रगतिशील युग हुआ विराम
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Gyanranjan-Death
ज्ञानरंजन हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कथाकार और संपादक थे।
90 वर्ष की आयु में उनका निधन जबलपुर में हुआ।
उनके साहित्यिक योगदान ने प्रगतिशील विचारों को बढ़ावा दिया।
Jabalpur / पहल के संपादक और विख्यात कथाकार ज्ञानरंजन का 7 जनवरी को रात्रि 10.30 बजे जबलपुर में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें उसी दिन सुबह इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
ज्ञानरंजन न केवल एक अप्रतिम कथाकार और गद्यकार थे, बल्कि हिंदी साहित्य के समृद्ध संपादक भी रहे। उन्होंने साहित्यिक जगत में अपनी गहरी समझ, संवेदनशील दृष्टिकोण और सामाजिक चेतना के लिए विशेष स्थान बनाया। उनके संपादन और लेखन ने हिन्दी साहित्य में नए विचारों और प्रगतिशील दृष्टिकोण को मजबूत किया।
उनका जाना हिंदी साहित्य के एक युग के अंत जैसा है। ज्ञानरंजन के निधन से साहित्य और प्रगतिशील चेतना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ क्षीण हो गया है। उनके योगदान और विचार हमेशा पाठकों और साहित्यकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। हिंदी साहित्य जगत और उनके प्रशंसकों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।