रीवा कलेक्टर की नई कार्यशैली: बस से गांव पहुंचे, जनता के बीच जाकर सुनी समस्याएं
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रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पदभार संभालते ही बस से दूर-दराज क्षेत्रों का दौरा कर प्रशासन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने का संदेश दिया।
डभौरा क्षेत्र में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को फील्ड में जाकर समाधान करने के निर्देश दिए।
Rewa/ मध्य प्रदेश के रीवा जिले में नवागत कलेक्टर Narendra Suryavanshi ने पदभार संभालते ही अपनी अलग कार्यशैली से प्रशासनिक तंत्र को नया संदेश दिया है। उन्होंने सरकारी वाहन छोड़कर अधिकारियों के साथ ट्रेवलर बस से दूर-दराज के क्षेत्रों का दौरा किया और सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं। उनके इस कदम को प्रशासन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
पदभार ग्रहण करने के बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने औपचारिकता निभाने के बजाय फील्ड में जाने को प्राथमिकता दी। वे उत्तर प्रदेश सीमा से सटे डभौरा क्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सिर्फ दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि क्षेत्र में जाकर समस्याओं का समाधान करें।
कलेक्टर ने साफ कहा कि प्रशासन की वास्तविक जिम्मेदारी जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना और उनका त्वरित निराकरण करना है। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम करने और लोगों से सीधे संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए।
अपने दौरे के दौरान कलेक्टर एक सरकारी स्कूल भी पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। बच्चों ने भी कलेक्टर के साथ खुलकर संवाद किया और अपनी समस्याएं साझा कीं।
कलेक्टर सूर्यवंशी की इस कार्यशैली से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अब प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाया जाएगा। उनका यह प्रयास न केवल अधिकारियों को सक्रिय करेगा, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच विश्वास भी मजबूत करेगा।
स्थानीय लोगों ने कलेक्टर के इस कदम की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि इससे उनकी समस्याओं का समाधान तेजी से होगा। यह पहल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव का संकेत मानी जा रही है।