रायसेन कृषि महोत्सव में जाने से रोके गए जीतू पटवारी, भाजपा सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
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रायसेन कृषि महोत्सव में जाने से पहले ही जीतू पटवारी को पुलिस ने भोपाल में रोका, जिससे सियासी विवाद और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया, लेकिन कांग्रेस ने इसे राजनीतिक दबाव और सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया।
Raisen News/ मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित “उन्नत कृषि महोत्सव” के समापन से पहले सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari को कार्यक्रम में शामिल होने से पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया। इस घटना के बाद उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। इस बीच केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भोपाल पहुंच चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, जीतू पटवारी रायसेन में आयोजित कृषि महोत्सव में शामिल होने के लिए रवाना हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें भोपाल में ही रोक दिया। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा कारणों और उच्च स्तर के निर्देशों के चलते यह निर्णय लिया गया है।
घटना से नाराज पटवारी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “यह लोकतंत्र है या तालिबान शासन?” उन्होंने आरोप लगाया कि एक किसान पुत्र को कृषि मेले में जाने से रोकना संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘किसान कल्याण वर्ष’ मनाया जा रहा है, लेकिन किसान से जुड़े कार्यक्रम में ही उन्हें जाने से रोका जा रहा है।
पटवारी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को पत्र लिखकर कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति मांगी थी और यह स्पष्ट किया था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम में भाग लेंगे। बावजूद इसके, उन्हें बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने “डर” के कारण भारी पुलिस बल तैनात कर उनका रास्ता रोका। उनके अनुसार, भोपाल में वाटर कैनन सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस और पटवारी के बीच इस दौरान काफी बहस भी हुई, लेकिन स्थिति नहीं बदली।
कांग्रेस नेता ने कहा कि वे कृषि मेले में आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीज और उपकरणों के बारे में जानकारी लेने जा रहे थे, ताकि किसानों के बीच इसका प्रचार कर सकें। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की मंशा और नीतियों पर बड़ा सवाल बताया।
यह मामला अब राजनीतिक रूप से तूल पकड़ता नजर आ रहा है, जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रहा है, वहीं प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्था का हवाला दे रहा है।