स्कूलों की किताबों का बोझ बढ़ा: महंगी लिस्ट और तय दुकानों से अभिभावक परेशान

Mon 13-Apr-2026,04:24 PM IST +05:30

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स्कूलों की किताबों का बोझ बढ़ा: महंगी लिस्ट और तय दुकानों से अभिभावक परेशान Private-Schools-Book-Cost-Issue-India
  • निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबों की सूची और तय दुकानों से खरीदारी का दबाव, अभिभावकों की जेब पर बढ़ता आर्थिक बोझ।

  • प्रशासन ने अभिभावकों को किसी भी दुकान से खरीद की स्वतंत्रता दी, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक दबाव एक बार फिर बढ़ गया है। CBSE से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षाएं शुरू होते ही किताबों की लंबी सूची जारी कर दी गई है। कई अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है और इसके लिए कुछ तय दुकानों का ही विकल्प दिया जा रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि बाजार में सस्ती किताबें उपलब्ध होने के बावजूद स्कूल प्रबंधन द्वारा अधिकृत दुकानों से ही खरीदारी करने का दबाव बनाया जाता है। इन दुकानों पर किसी तरह की छूट नहीं मिलती, जिससे खर्च और बढ़ जाता है। कई स्कूलों ने किताबों की सूची देने के बजाय सीधे दुकान का पता दे दिया है, जहां पहले से तैयार ‘रेडीमेड सेट’ थमा दिया जाता है।

यदि कोई अभिभावक केवल जरूरत की किताबें लेना चाहता है, तो उसे बाद में आने को कहा जाता है या पूरी किट खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इससे अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता और उन्हें पूरा सेट खरीदना पड़ता है।

हर साल सिलेबस में मामूली बदलाव कर नई किताबें अनिवार्य करने की शिकायत भी सामने आई है। निजी प्रकाशक 1-2 अध्याय में छोटे बदलाव कर किताबों को नया संस्करण बता देते हैं, जिससे पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं। इस प्रक्रिया के चलते हर साल नई किताबें खरीदना अभिभावकों की मजबूरी बन गई है।

कीमतों की बात करें तो एनसीईआरटी की किताबें जहां अपेक्षाकृत सस्ती हैं, वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें कई गुना महंगी बिक रही हैं। एक ही विषय की किताब के लिए अभिभावकों को 4000 से 7000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि एनसीईआरटी की किताबें 1500 से 2000 रुपये में उपलब्ध हैं।

स्थानीय विक्रेताओं के अनुसार, स्कूलों द्वारा सुझाई गई किताबों में से करीब 30 प्रतिशत सामग्री का उपयोग नहीं होता। इसके बावजूद अभिभावकों को पूरा सेट खरीदना पड़ता है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अभिभावक को एक विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा होता है, तो इसकी शिकायत की जा सकती है। वहीं स्कूल प्रबंधन ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वे केवल मार्गदर्शन देते हैं।

हर साल दोहराई जाने वाली यह समस्या अब एक बड़ी चिंता बन गई है, जिससे अभिभावकों को आर्थिक रूप से जूझना पड़ रहा है।