बिहार के कैथवलिया गांव में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की प्राणप्रतिष्ठा संपन्न
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बिहार के कैथवलिया गांव में वैदिक विधि से दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की भव्य प्राणप्रतिष्ठा संपन्न हुई।
प्राणप्रतिष्ठा समारोह में देशभर से श्रद्धालु, संत और विद्वान शामिल हुए, गांव में उत्सव का माहौल रहा।
विशाल शिवलिंग से धार्मिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
Delhi / बिहार के कैथवलिया गांव में आध्यात्मिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यहां दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की भव्य प्राणप्रतिष्ठा विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु, संत-महात्मा और धार्मिक विद्वान बड़ी संख्या में पहुंचे। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
विशाल आकार के इस शिवलिंग को पारंपरिक शिल्प और आधुनिक तकनीक के संतुलन से तैयार किया गया है। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था, जहां सुबह से ही हवन, रुद्राभिषेक और शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ होता रहा। प्राणप्रतिष्ठा के दौरान “हर-हर महादेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। आयोजकों के अनुसार, इस शिवलिंग का निर्माण वर्षों की साधना, योजना और सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि शिवलिंग केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सृष्टि, चेतना और संतुलन का भी प्रतिनिधित्व करता है। इस दृष्टि से इतने विशाल शिवलिंग की स्थापना न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर से क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।
प्राणप्रतिष्ठा समारोह में सामाजिक एकता का भी संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि यह स्थल सभी वर्गों और समुदायों के लिए खुला रहेगा और यहां आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और स्वयंसेवकों ने मिलकर विशेष इंतजाम किए थे।
स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस धार्मिक केंद्र के विकसित होने से रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। श्रद्धालुओं के लिए ठहरने, प्रसाद और अन्य सुविधाओं की योजना भी बनाई जा रही है। कैथवलिया गांव में स्थापित यह विशाल शिवलिंग अब न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि बिहार के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान भी स्थापित करेगा।