गुजरात में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: ज्ञानेंद्र सिंह मलिक बने नए DGP & IGP, पुलिस व्यवस्था में नई शुरुआत

Sat 06-Jun-2026,11:07 PM IST +05:30

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गुजरात में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: ज्ञानेंद्र सिंह मलिक बने नए DGP & IGP, पुलिस व्यवस्था में नई शुरुआत Gujarat DGP News
  • ज्ञानेंद्र सिंह मलिक बने गुजरात के नए DGP & IGP. 

  •  अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर से मिली राज्य की बड़ी जिम्मेदारी. 

  • पुलिस व्यवस्था में सुधार और मजबूती की उम्मीद. 

Delhi / New Delhi :

Gujrat / गुजरात पुलिस प्रशासन में शनिवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य के गृह विभाग ने अहमदाबाद शहर के पुलिस कमिश्नर ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को गुजरात का नया पुलिस महानिदेशक (DGP & IGP) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य में लंबे समय से पूर्णकालिक डीजीपी का पद खाली था और प्रशासनिक व्यवस्था अस्थायी रूप से प्रभारी अधिकारी के भरोसे चल रही थी।

1 जनवरी 2026 से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के.एल.एन. राव राज्य के प्रभारी डीजीपी के रूप में कार्यभार संभाल रहे थे। अब उनकी जगह ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि मलिक सोमवार तक औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण कर सकते हैं।

1993 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी जी. एस. मलिक का करियर काफी प्रभावशाली रहा है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत है। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से बी.टेक की पढ़ाई की है और इसके बाद गुजरात विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। तकनीकी और कानूनी दोनों क्षेत्रों में उनकी समझ उन्हें एक अलग पहचान देती है।

मलिक केवल राज्य स्तर पर ही नहीं बल्कि केंद्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर बनने से पहले वे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुरक्षा परियोजनाओं का संचालन किया।

मूल रूप से हरियाणा से संबंध रखने वाले जी. एस. मलिक के पास प्रशासनिक अनुभव का लंबा इतिहास है। गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, वे अक्टूबर 2028 तक इस पद पर सेवाएं देंगे। इतने लंबे कार्यकाल को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में गुजरात पुलिस में कई महत्वपूर्ण सुधार और नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

उनकी नियुक्ति को राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे पुलिस व्यवस्था में और अधिक स्थिरता और प्रभावशीलता आने की संभावना है।