वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने संभाली पश्चिमी नौसेना कमान की कमान

Sat 30-May-2026,11:36 PM IST +05:30

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वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने संभाली पश्चिमी नौसेना कमान की कमान Vice Admiral Sanjay Vatsayan
  • वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने पश्चिमी नौसेना कमान संभाली. 

  • गौरव स्तम्भ पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि. 

  • नौसेना की रणनीतिक क्षमता और आधुनिकरण पर जोर. 

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / मुंबई में आयोजित एक औपचारिक परेड के दौरान वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया। यह अवसर भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। पदभार संभालने के तुरंत बाद उन्होंने नौसेना डॉकयार्ड स्थित गौरव स्तम्भ पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन किया।

वाइस एडमिरल संजय वात्सायन का नौसैनिक करियर बेहद विस्तृत और अनुभवपूर्ण रहा है। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला के पूर्व छात्र हैं और 1988 में भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त किया था। तोप और मिसाइल प्रणालियों के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अपने लंबे करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है।

अपने सेवा काल में उन्होंने कई प्रमुख युद्धपोतों की कमान संभाली, जिनमें आईएनएस विभूति, आईएनएस नाशक, आईएनएस कुठार और गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री शामिल हैं। इन जहाजों पर उनकी नेतृत्व क्षमता और तकनीकी समझ ने नौसेना की परिचालन शक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने देश के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों जैसे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन, नेवल वॉर कॉलेज गोवा और नेशनल डिफेंस कॉलेज नई दिल्ली से उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने नौसेना मुख्यालय में कई रणनीतिक और नीति-निर्माण से जुड़े पदों पर काम किया।

फ्लैग रैंक पर पदोन्नति के बाद उन्होंने सहायक नौसेना प्रमुख (नीति और योजना) के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने नौसेना की दीर्घकालिक रणनीति और विकास योजनाओं को दिशा दी। इसके बाद उन्होंने पूर्वी नौसेना कमान और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में भी महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाएं निभाईं, जिससे उनकी प्रशासनिक और रणनीतिक क्षमता और मजबूत हुई।

वे मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ में भी अहम पदों पर रहे, जहां उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय, संयुक्त अभियानों की योजना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने में योगदान दिया। उनकी भूमिका भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्तता और आधुनिकरण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

पद संभालने से पहले वे नौसेना के 47वें वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने नौसेना की क्षमता विस्तार और भविष्य की तैयारियों में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में कई आधुनिकरण परियोजनाओं को गति मिली।

उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और नौ सेना पदक से सम्मानित किया गया है। उनका यह नया दायित्व भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान को और अधिक सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।