राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ ने मनाया विश्व पर्यावरण दिवस 2026: वृक्षारोपण और पौध वितरण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
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National Ayurveda Vidyapeeth
वृक्षारोपण अभियान और पौध वितरण कार्यक्रम का आयोजन.
पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन शैली पर जोर.
आयुर्वेद के प्रकृति-आधारित दर्शन को बढ़ावा.
Delhi / नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (RAV) ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 को एक सार्थक और प्रेरणादायक तरीके से मनाया। इस अवसर पर विद्यापीठ परिसर में वृक्षारोपण अभियान और पौध वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम की थीम “प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” के अनुरूप सभी गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
इस आयोजन में विद्यापीठ के शासी निकाय के अध्यक्ष वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा, निदेशक डॉ. वंदना सिरोहा, एनसीआईएसएम के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। परिसर में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए और प्रतिभागियों को पौधे वितरित किए गए ताकि वे अपने घरों और समुदायों में भी हरियाली बढ़ा सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल वृक्षारोपण करना नहीं था, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी था।
गणमान्य अतिथियों ने अपने संबोधन में आयुर्वेद के पर्यावरणीय दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा प्रणाली नहीं है, बल्कि यह जीवन और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझाने वाला विज्ञान है। पंचमहाभूत सिद्धांत और लोक-पुरुष साम्य जैसे विचार यह बताते हैं कि मानव स्वास्थ्य सीधे पर्यावरण के संतुलन पर निर्भर करता है। इसलिए प्रकृति की रक्षा करना स्वयं मानव जीवन की रक्षा के समान है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में जब पर्यावरणीय चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ जैसे आयुर्वेद और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं। यह हमें सिखाता है कि सीमित संसाधनों का समझदारी से उपयोग करें और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीएं।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पौध वितरण भी रहा, जिसमें सभी प्रतिभागियों को पौधे दिए गए ताकि वे उन्हें अपने आसपास रोपित कर सकें और उनकी देखभाल कर सकें। इससे यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन शैली को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएंगे। यह आयोजन न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम था, बल्कि एक जागरूकता अभियान भी था, जिसने यह स्पष्ट किया कि प्रकृति के साथ संतुलन ही हमारे उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।