वायरल ऑडियो सामने आने के बाद जिले के पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया और जांच का जिम्मा सीओ सिटी पंकज पंत को सौंप दिया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन तब तक यह मामला विभाग के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुका है।
जानकारी के अनुसार, सिपाहियों को कोतवाली बुलाने के लिए चौक कोतवाल अश्वनी कुमार सिंह ने फोन पर कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया। पहले वायरल ऑडियो, जो करीब 48 सेकेंड का बताया जा रहा है, में एक सिपाही फोन पर यह कहता सुनाई देता है कि “लो, साहब से बात करो।” इसके बाद कोतवाल की आवाज में पूछा जाता है कि “कहां रह गया वो?” सिपाही जवाब देता है कि “साहब, बेटा रो रहा है।” इस पर झल्लाते हुए कोतवाल कहते हैं कि “एक मिनट में यहां आ जा, वरना गाड़ी घर ले जाकर खड़ी कर दूंगा, समझा कि नहीं।”
सिपाही के बार-बार यह कहने पर कि उसका बच्चा रो रहा है और वह अभी नहीं आ पा रहा, धमकी भरे लहजे में कहा जाता है कि “एक मिनट में यहां आ जा, नहीं तो पीआरवी भेज दूंगा, मुहल्ले में ड्रामा करवाऊंगा।” इसके बाद सिपाही यह कहकर फोन काट देता है कि बच्चा चुप हो जाए, फिर वह आ रहा है। यह ऑडियो सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों देखी जा रही है।
दूसरा वायरल ऑडियो करीब 27 सेकेंड का बताया जा रहा है। इसमें सिपाही को शराबी कहकर बुलाया जा रहा है और समय पर न पहुंचने पर गाली-गलौज के साथ गोली मारने की धमकी दी जा रही है। इन ऑडियो क्लिप्स के इंटरनेट मीडिया पर फैलते ही पुलिस विभाग की तीखी आलोचना शुरू हो गई है।
मामले पर सफाई देते हुए प्रभारी निरीक्षक अश्वनी कुमार सिंह ने कहा है कि संबंधित सिपाहियों पर सुविधा शुल्क या वसूली के आरोप लग रहे थे। इसी वजह से उन्हें थाने बुलाया जा रहा था, ताकि पूछताछ कर सच्चाई सामने लाई जा सके। हालांकि, जब उनसे भाषा और धमकी को लेकर सवाल किए गए, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए टालमटोल किया।
इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस महानिदेशक तक को ट्वीट कर शिकायतें भेजी हैं। लोगों का कहना है कि जब एक कोतवाल अपने ही अधीनस्थों से इस तरह की भाषा और व्यवहार करता है, तो आम जनता के साथ उसका रवैया कैसा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
फिलहाल, सीओ सिटी द्वारा जांच शुरू कर दी गई है और पुलिस प्रशासन का दावा है कि निष्पक्ष जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन तब तक यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली और आंतरिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता रहेगा।