NICDC बैठक: औद्योगिक क्लस्टर पुनरुद्धार और MSME विकास पर जोर

Wed 18-Mar-2026,01:17 PM IST +05:30

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NICDC बैठक: औद्योगिक क्लस्टर पुनरुद्धार और MSME विकास पर जोर NICDC-Industrial-Cluster-Revival-Meet
  • MSME को केंद्र में रखकर वित्त, तकनीकी समर्थन और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा हुई।

  • सरकार और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाकर बजट घोषणाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने और निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करने पर सहमति बनी।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली/ रष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) ने नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में निर्यात उन्मुख औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार पर एक अहम परामर्श बैठक आयोजित की। यह बैठक केंद्रीय बजट में घोषित औद्योगिक क्लस्टर विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैठक "आर्थिक विकास को बनाए रखने और मजबूत करने" विषय पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनार के अनुवर्ती के रूप में आयोजित की गई थी। इसमें निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संघों, वित्तीय संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।

चर्चा के दौरान विशेषज्ञों और हितधारकों ने क्लस्टर पुनरुद्धार के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल बुनियादी ढांचे का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे क्षमता निर्माण, तकनीकी उन्नयन और बाजार पहुंच के साथ जोड़ना आवश्यक है।

घरेलू विनिर्माण को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों ने उन क्षेत्रों पर फोकस करने की जरूरत बताई, जहां भारत की आयात निर्भरता अधिक है। इसके साथ ही परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता मानकों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें।

एमएसएमई सेक्टर को क्लस्टर विकास का केंद्र बिंदु माना गया। चर्चा में छोटे और मध्यम उद्योगों को वित्तीय सहायता, तकनीकी समर्थन और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की बात कही गई। इससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी और वे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं का हिस्सा बन सकेंगे।

बैठक में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के औद्योगिक विकास के लिए इन तत्वों का समावेश अनिवार्य है।

प्रभावी शासन तंत्र पर भी चर्चा हुई, जिसमें विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाली भागीदारी को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया। साथ ही क्लस्टर स्तर पर सुविधा केंद्र स्थापित करने और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता बताई गई।

इस परामर्श सत्र में सामाजिक और शहरी बुनियादी ढांचे को भी महत्वपूर्ण बताया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि औद्योगिक क्लस्टरों के विकास के साथ-साथ श्रमिकों के लिए बेहतर जीवन सुविधाएं सुनिश्चित करना भी जरूरी है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता बनी रहे।

बैठक का मार्गदर्शन एनआईसीडीसी के सीईओ और प्रबंध निदेशक रजत कुमार सैनी ने किया, जबकि इसकी अध्यक्षता उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने की।

इसमें एसोचैम, फिक्की, सीआईआई, नैसकॉम, सिडबी सहित कई प्रमुख उद्योग संगठनों और रिलायंस, टाटा केमिकल्स जैसी कंपनियों ने भाग लिया। यह बैठक उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करने और बजट घोषणाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।