बड़वानी में एजुकेट गर्ल्स का 18वाँ स्थापना दिवस: कक्षा 10 पास करने वाली बेटियों का सम्मान, शिक्षा को मिला नया हौसला

Mon 16-Mar-2026,02:52 PM IST +05:30

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बड़वानी में एजुकेट गर्ल्स का 18वाँ स्थापना दिवस: कक्षा 10 पास करने वाली बेटियों का सम्मान, शिक्षा को मिला नया हौसला Barwani Education Program
  • एजुकेट गर्ल्स ने बड़वानी में 18वाँ स्थापना दिवस मनाया।

  • कक्षा 10 पास करने वाली शिक्षार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

  • प्रगति कार्यक्रम से पढ़ाई छोड़ चुकी लड़कियों को मिला दूसरा मौका।

Madhya Pradesh / Barwani :

Barwani / बड़वानी जिले में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम कर रहे संगठन एजुकेट गर्ल्स ने अपना 18वाँ स्थापना दिवस उत्साह और गर्व के साथ मनाया। इस खास मौके पर मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल (एमपीएसओएस) के माध्यम से कक्षा 10 की परीक्षा पास करने वाली शिक्षार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में सरकारी अधिकारी, साझेदार संगठन, स्वयंसेवक, सामुदायिक मार्गदर्शक (प्रेरक) और बड़ी संख्या में शिक्षार्थी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर ग्रामीण और शैक्षिक रूप से वंचित क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लगभग दो दशकों के प्रयासों का उत्सव मनाया।

समारोह के दौरान कक्षा 10 की परीक्षा पास करने वाली लड़कियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इनमें से कई शिक्षार्थी ऐसी थीं, जिन्होंने वर्षों बाद फिर से पढ़ाई शुरू की और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की। कार्यक्रम में आयोजित इंटरैक्टिव सत्रों में शिक्षार्थियों, प्रेरकों और टीम बालिका स्वयंसेवकों ने अपने संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानियाँ साझा कीं। इन अनुभवों ने कार्यक्रम में मौजूद अन्य लड़कियों और अभिभावकों को भी शिक्षा के महत्व के प्रति प्रेरित किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद काजल जावला, आईएएस, कलेक्टर जिला पंचायत, ने परिवारों से बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि लड़कियाँ पढ़कर क्या करेंगी या क्या वे कलेक्टर बन सकती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे भी एक किसान परिवार से आती हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें पढ़ने का अवसर दिया। उनके विश्वास और समाज के सहयोग से ही वे कलेक्टर बनने का सपना पूरा कर सकीं। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपनी बेटियों को पढ़ने दें और उनके सपनों को पूरा करने का अवसर दें, क्योंकि एक शिक्षित बेटी केवल अपना जीवन ही नहीं बल्कि पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है।

इस अवसर पर पद्मा विलोचन शुक्ला, आईपीएस, ने भी संगठन की सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर प्रवासन के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती है। कई परिवार काम की तलाश में बाहर जाते हैं, जिससे बच्चों को भी पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। ऐसे में एजुकेट गर्ल्स जैसे संगठन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ते हैं तो वे अपने परिवार, राज्य और देश का नाम रोशन करते हैं।

कार्यक्रम की एक प्रमुख झलक प्रगति कार्यक्रम के तहत पढ़ाई पूरी करने वाले शिक्षार्थियों का सम्मान था। प्रगति, एजुकेट गर्ल्स का “सेकंड-चांस” शिक्षा कार्यक्रम है, जो 15 से 29 वर्ष के उन युवाओं के लिए बनाया गया है जो किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुके थे। गाँवों में आयोजित लर्निंग कैंप्स के माध्यम से यह कार्यक्रम शिक्षार्थियों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ता है और उन्हें जीवन कौशल तथा आत्मविश्वास भी प्रदान करता है, ताकि वे राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से कक्षा 10 की परीक्षा दे सकें।

इस वर्ष 6,000 से अधिक शिक्षार्थियों का कक्षा 10 की परीक्षा के लिए नामांकन किया गया है। वर्ष 2017 से एजुकेट गर्ल्स के विद्या कार्यक्रम के माध्यम से चार लाख से अधिक लड़कियाँ और युवतियाँ माध्यमिक शिक्षा से दोबारा जुड़ चुकी हैं। पिछले वर्ष शुरू हुआ प्रगति कार्यक्रम उन शिक्षार्थियों के लिए नए अवसर प्रदान कर रहा है, जिन्होंने कभी अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी।

कार्यक्रम में 21 शिक्षार्थियों, 26 प्रेरकों और 20 टीम बालिका स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया। कई लड़कियों ने सामाजिक बाधाओं, घरेलू जिम्मेदारियों और लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने जैसी चुनौतियों को पार करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। कई शिक्षार्थियों के लिए यह उनकी उपलब्धियों की पहली सार्वजनिक पहचान थी, जिसने उनके गाँवों की अन्य लड़कियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

समारोह के अंत में आयोजित पैनल चर्चा का संचालन विक्रम सोलंकी, निदेशक– संचालन ने किया। इस चर्चा में शिक्षार्थियों, टीम बालिका स्वयंसेवकों और प्रेरकों ने अपनी शिक्षा की यात्रा साझा की और बताया कि कैसे सामुदायिक सहयोग और सही मार्गदर्शन से लड़कियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह कार्यक्रम न केवल उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि लड़कियों की शिक्षा को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बना।