लारिजानी की मौत के बाद ईरान-इजराइल युद्ध भड़का
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इजराइली एयरस्ट्राइक में अली लारिजानी की मौत के बाद ईरान-इजराइल संघर्ष ने खतरनाक मोड़ लिया, क्षेत्रीय और वैश्विक तनाव तेजी से बढ़ा।
ईरान ने तेल अवीव पर 100 से ज्यादा मिसाइलों से हमला किया, IRGC की बड़ी भूमिका, आयरन डोम पर दबाव और सुरक्षा चुनौती बढ़ी।
Iran/ ईरान और इजराइल के बीच चल रहा तनाव अब खुली जंग में बदलता जा रहा है। 19वें दिन इजराइल की एयरस्ट्राइक में ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी और उनके बेटे की मौत की पुष्टि के बाद हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। तेहरान ने आधिकारिक तौर पर इस खबर की पुष्टि की, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अली लारिजानी ईरान की राजनीति और रणनीतिक नीति के प्रमुख स्तंभ माने जाते थे। वे देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व प्रमुख और संसद के स्पीकर रह चुके थे। इसके अलावा, वे सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी सलाहकारों में शामिल थे। उनकी मौत को ईरान के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
इस घटना के बाद ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल के तेल अवीव शहर पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया। ईरान की इस कार्रवाई में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की अहम भूमिका रही। ईरान का दावा है कि उसने 100 से अधिक मिसाइलें दागीं, जिनमें क्लस्टर वारहेड का भी इस्तेमाल किया गया।
इजराइल की आयरन डोम रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहीं। इस हमले में कम से कम एक नागरिक की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि NATO के कई देश ईरान के खिलाफ खुलकर अमेरिका का समर्थन करने के पक्ष में नहीं हैं, जिससे पश्चिमी देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। बड़े नेताओं की मौत, लगातार हो रहे मिसाइल हमले और वैश्विक शक्तियों की बढ़ती भागीदारी ने हालात को बेहद नाजुक बना दिया है।
अली लारिजानी की मौत को ईरान की रणनीतिक क्षमता के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। वहीं, ईरान का आक्रामक रुख यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज हो सकता है। दुनिया भर की निगाहें अब इस संकट पर टिकी हुई हैं।