UPI शुल्क पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, आम यूजर्स के लिए भुगतान रहेगा फ्री

Sat 08-Aug-2026,11:44 PM IST +05:30

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UPI शुल्क पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, आम यूजर्स के लिए भुगतान रहेगा फ्री UPI Transaction Update
  • आम नागरिकों के लिए UPI भुगतान निःशुल्क रहेगा।

  • P2P लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

  • संभावित MDR केवल कुछ व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / यूपीआई लेन-देन पर संभावित शुल्क को लेकर जारी चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के दैनिक यूपीआई भुगतान पर कोई तत्काल शुल्क लगाने का फैसला नहीं किया गया है। सरकार के मुताबिक, पर्सन-टू-पर्सन यानी P2P लेन-देन निःशुल्क रहेंगे और आम यूजर्स को हर यूपीआई भुगतान के लिए अलग से चार्ज नहीं देना होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किया जाता है, तो इसका दायरा सीमित व्यापारी लेन-देन तक रखा जा सकता है। निर्धारित सीमा से ऊपर होने वाले कुछ व्यापारी लेन-देन पर मामूली दर लागू किए जाने की संभावना है, जबकि अधिकांश व्यापारी लेन-देन को निःशुल्क रखने की बात कही गई है।

क्या है MDR और क्यों हो रही है चर्चा?
MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के लेन-देन से संबंधित होता है। जनवरी 2020 से बैंक-अकाउंट आधारित BHIM-UPI लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए MDR को शून्य किया गया था। सरकार ने अप्रैल 2025 में भी स्पष्ट किया था कि UPI पर MDR नहीं लिया जा रहा है और ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर GST लगाने की कोई योजना नहीं है।

इसी व्यवस्था में कानूनी बदलावों को लेकर अब बहस तेज हुई है। सरकार का तर्क है कि UPI के लगातार बढ़ते विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम, तकनीकी ढांचे और भुगतान प्रणाली की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश जरूरी है।

UPI को आत्मनिर्भर बनाने की चुनौती
सरकार के अनुसार, भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ा है। ऐसे में इतने बड़े भुगतान नेटवर्क को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए टिकाऊ वित्तीय मॉडल की जरूरत है। सरकार का जोर इस बात पर है कि UPI आम नागरिकों के लिए किफायती बना रहे, लेकिन भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े संस्थानों के लिए भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों।

NPCI के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में UPI पर करीब 23,201.93 मिलियन यानी 2,320 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹29.90 लाख करोड़ रहा। उस महीने 720 बैंक UPI पर लाइव थे।

आम यूजर को क्या समझना चाहिए?
सबसे अहम बात यह है कि हर UPI भुगतान पर शुल्क लगने की खबर सही नहीं है। P2P भुगतान के लिए शुल्क लगाने की बात सरकार ने स्वीकार नहीं की है। संभावित MDR मुख्य रूप से व्यापारी लेन-देन से संबंधित है और यदि इसे लागू किया जाता है तो उसकी सीमा, दर और दायरा अलग से निर्धारित किया जाएगा।

इसलिए सोशल मीडिया या अपुष्ट रिपोर्टों के आधार पर यह मान लेना कि अब हर UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क देना पड़ेगा, सही नहीं होगा। नागरिकों को वित्त मंत्रालय, RBI और NPCI की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बना UPI
2016 में शुरू हुआ UPI आज भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसकी तेज, अंतर-संचालनीय और व्यापक पहुंच ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक भुगतान के तरीके को बदल दिया है। UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी जारी है और भारत दूसरे देशों के साथ सीमा-पार डिजिटल भुगतान संपर्क बढ़ा रहा है। जून 2026 में भारत और नेपाल के बीच UPI-आधारित P2P सीमा-पार रेमिटेंस व्यवस्था भी शुरू की गई।

निष्कर्ष: सरकार का संदेश साफ है कि आम नागरिकों के लिए UPI को सरल और किफायती बनाए रखना प्राथमिकता है। संभावित MDR की चर्चा मुख्यतः व्यापारी भुगतान और UPI के दीर्घकालिक वित्तीय ढांचे से जुड़ी है। इसलिए फिलहाल आम यूजर को अपने सामान्य UPI भुगतान पर अचानक शुल्क लगने की चिंता करने की जरूरत नहीं है।