Cyber Crime पर सरकार का बड़ा एक्शन, 3,718 ऐप ब्लॉक; 11,158 करोड़ रुपये बचाए
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16Cyber Crime पर सरकार का बड़ा एक्शन
3,718 मोबाइल ऐप किए गए ब्लॉक।
11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाई गई।
15.75 लाख से ज्यादा सिम कार्ड ब्लॉक।
New Delhi / गृह राज्य मंत्री बांदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है।
I4C के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल के जरिए नागरिक साइबर अपराध से जुड़ी घटनाओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
3,718 मोबाइल ऐप किए गए ब्लॉक
सरकार ने साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए कई डिजिटल माध्यमों पर कार्रवाई की है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत 30 जून 2026 तक कुल 3,718 मोबाइल ऐप ब्लॉक किए गए हैं। इनमें धोखाधड़ी वाले ऋण ऐप भी शामिल हैं।
इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थों को गैरकानूनी सामग्री, डेटा या संचार लिंक हटाने अथवा निष्क्रिय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सहयोग पोर्टल शुरू किया गया है।
32.80 लाख से अधिक शिकायतें
I4C के अंतर्गत नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली वर्ष 2021 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल सूचना प्राप्त करना और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकना है।
सरकार के अनुसार, 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि को बचाया गया है। यह प्रणाली बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय कर साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई में मदद करती है।
संदिग्ध खातों पर भी कार्रवाई
साइबर अपराधियों की पहचान और उनके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए I4C ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से संदिग्ध रजिस्टर शुरू किया। यह व्यवस्था 10 सितंबर 2024 को शुरू की गई थी।
30 जून 2026 तक बैंकों से प्राप्त 30.48 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं का डेटा और 32.08 लाख लेयर-1 संदिग्ध खातों की जानकारी संबंधित संस्थाओं के साथ साझा की गई। इसके परिणामस्वरूप 25,698 करोड़ रुपये के लेन-देन को नामंजूर किया गया।
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इसी अवधि तक सरकार ने 15.75 लाख से अधिक सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबर भी ब्लॉक किए हैं।
पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की व्यवस्था
साइबर अपराध की शिकायतों के निपटारे में तेजी और एकरूपता लाने के लिए गृह मंत्रालय ने I4C द्वारा संचालित नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली के लिए व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है।
इसके तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से प्राप्त शिकायतों की प्रक्रिया, बैंकों के साथ समन्वय, शिकायत निवारण, अस्थायी रोक हटाने और धोखाधड़ी से हड़पी गई राशि को सही दावेदारों को वापस करने के लिए एक मानकीकृत व्यवस्था तैयार की गई है।
अप्रैल 2026 से धन बहाली प्रारूप और शिकायत निवारण मॉड्यूल भी शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य पीड़ितों को धोखाधड़ी से हड़पी गई राशि जल्द वापस दिलाना और बैंक खातों को फ्रीज करने तथा राशि पर रोक लगाने से जुड़ी शिकायतों का समय पर निपटारा करना है।
साइबर जागरूकता पर भी जोर
सरकार साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चला रही है। इनमें कॉलर ट्यून, SMS संदेश, टीवी और रेडियो अभियान, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, सिनेमा हॉल में विज्ञापन, सोशल मीडिया अभियान और प्रसिद्ध हस्तियों के माध्यम से जागरूकता फैलाना शामिल है।
इसके अलावा CyberDost के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, IPL अभियान, MyGov के माध्यम से प्रचार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से साइबर सुरक्षा जागरूकता सप्ताह, छात्रों के लिए हैंडबुक तथा रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर डिजिटल डिस्प्ले के जरिए भी लोगों को साइबर अपराधों से सतर्क किया जा रहा है।
सरकार के इन प्रयासों का उद्देश्य साइबर अपराध की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, वित्तीय नुकसान को रोकना, संदिग्ध डिजिटल नेटवर्क पर शिकंजा कसना और आम नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति अधिक जागरूक बनाना है।