ब्रिक्स बैठक में ‘चेन्नई घोषणापत्र’ मंजूर, विज्ञान-तकनीक सहयोग को नई दिशा
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BRICS Science Meeting
ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक में ‘चेन्नई घोषणापत्र’ सर्वसम्मति से मंजूर।
एआई, क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।
युवा वैज्ञानिकों, स्टार्टअप और साझा अनुसंधान अवसंरचना को मिलेगा बढ़ावा।
New Delhi / भारत की अध्यक्षता में आयोजित 14वीं ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक के समापन सत्र में ‘चेन्नई घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से अपनाया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में प्रभावी, लचीला और भविष्य के लिए तैयार सहयोग ढांचा विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
चेन्नई घोषणापत्र में जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग का आधार बनाया गया है। इसमें सतत विकास, समावेशी वृद्धि, सामाजिक कल्याण और ब्रिक्स देशों के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए तकनीक और नवाचार के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
साझा चुनौतियों से निपटने पर जोर
समापन संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बैठक में हुई चर्चाओं ने अधिक लचीले, समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, क्वांटम तकनीक, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, जलवायु और स्थिरता जैसे क्षेत्रों में ब्रिक्स देश साझा अवसरों और चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकते हैं।
चेन्नई घोषणापत्र में ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग की बढ़ती परिपक्वता का भी उल्लेख किया गया। इसके तहत 14 विषयगत कार्य समूह, ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक मंच के 11 संस्करण, युवा नवप्रवर्तक पुरस्कार के 9 संस्करण और ब्रिक्स एसटीआई फ्रेमवर्क कार्यक्रम के 9 आह्वान लगातार सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।
साझा अनुसंधान अवसंरचना पर विशेष ध्यान
बैठक में साझा अनुसंधान अवसंरचना और मेगा-विज्ञान परियोजनाओं को सहयोग का प्रमुख क्षेत्र माना गया। घोषणापत्र में ब्रिक्स ग्लोबल रिसर्च एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क (BRICS GRAIN) को परिचालन में लाने की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया गया।
इस नेटवर्क का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के शोधकर्ताओं को उन्नत अनुसंधान सुविधाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना, शोधकर्ताओं की गतिशीलता बढ़ाना और बड़े स्तर की अनुसंधान परियोजनाओं में सहयोग को मजबूत करना है। कार्य योजना में संयुक्त शोध, उन्नत तकनीकी विकास और क्षमता निर्माण को भी शामिल किया गया है।
ब्रिक्स विज्ञान एवं अनुसंधान भंडार को मंजूरी
चेन्नई घोषणापत्र में ब्रिक्स विज्ञान एवं अनुसंधान भंडार का भी स्वागत किया गया। इसे वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं, शोध परिणामों, डेटासेट, अनुसंधान अवसंरचना और सहयोग के अवसरों की जानकारी साझा करने वाले डिजिटल मंच के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों में ज्ञान के आदान-प्रदान और खुले विज्ञान को बढ़ावा देना है। साथ ही राष्ट्रीय नियमों और डेटा प्रशासन से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप शोध क्षमताओं की बेहतर पहचान और उपयोग सुनिश्चित करना है।
युवा वैज्ञानिकों और स्टार्टअप को बढ़ावा
बैठक में युवा वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। चेन्नई घोषणापत्र में ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक मंच और ब्रिक्स युवा नवप्रवर्तक पुरस्कार के तहत चल रही गतिविधियों का स्वागत किया गया। इसके अलावा इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और शुरुआती चरण के निवेशकों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
घोषणापत्र में BRICS Youth Startup Platform का स्वागत करते हुए शुरुआती और विकास चरण के स्टार्टअप के लिए वित्तीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड के विचार का भी उल्लेख किया गया।
रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग
चेन्नई घोषणापत्र में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और एआई, जैव प्रौद्योगिकी एवं मानव स्वास्थ्य, सामग्री विज्ञान, नैनो प्रौद्योगिकी, फोटोनिक्स, खगोल विज्ञान, भू-स्थानिक तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, महासागर एवं ध्रुवीय विज्ञान, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन तथा सामाजिक विज्ञान और मानविकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिक्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी को केवल संवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे संयुक्त परियोजनाओं, साझा मंचों, सामूहिक आह्वानों और खुले अनुसंधान बुनियादी ढांचे के जरिए ठोस परिणामों में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीक सुलभ, किफायती और जिम्मेदार होनी चाहिए तथा उसका अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन में सुधार होना चाहिए।
बैठक में 2026-27 के लिए ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार गतिविधियों के कैलेंडर को भी मंजूरी दी गई। अगली ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक 2027 में चीन की अध्यक्षता में आयोजित होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी ब्रिक्स देशों के मंत्रियों, प्रतिनिधिमंडलों, विशेषज्ञों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की अध्यक्षता में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार दिशा मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स वैज्ञानिक सहयोग वैश्विक दक्षिण के लिए लचीलापन, सतत विकास, नवाचार और साझा प्रगति का मजबूत माध्यम बनेगा।