MCD पूर्वी जोन में रिश्वत लेते दो बिलिंग क्लर्क गिरफ्तार, एसीबी की कार्रवाई

Tue 15-Sep-2026,08:49 PM IST +05:30

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MCD पूर्वी जोन में रिश्वत लेते दो बिलिंग क्लर्क गिरफ्तार, एसीबी की कार्रवाई MCD Bribery Case
  • एमसीडी के पूर्वी जोन में एसीबी ने दो बिलिंग क्लर्क को गिरफ्तार किया।

  • दोनों पर सेवानिवृत्ति के बाद लंबित बिल पास कराने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप है।

  • एसीबी अब मामले में अन्य कर्मचारियों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी के पूर्वी जोन में एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी ने रिश्वतखोरी के आरोप में दो बिलिंग क्लर्क को गिरफ्तार किया है। दोनों कर्मचारी पर्यावरण प्रबंधन सेवाएं यानी डेम्स विभाग में तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने निगम के एक पूर्व कर्मचारी के सेवानिवृत्ति के बाद लंबित बिलों को पास कराने के नाम पर रिश्वत की मांग की थी। एसीबी की टीम ने सोमवार शाम ट्रैप कार्रवाई करते हुए दोनों को निगम कार्यालय के बाहर से गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों की पहचान संजय और हरीश के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, एमसीडी के एक पूर्व कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद उसके कुछ बिल लंबे समय से लंबित थे। इन बिलों को पास कराने और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर दोनों बिलिंग क्लर्क ने रिश्वत की मांग की थी। परेशान होकर पूर्व कर्मचारी ने कुछ दिन पहले एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलने के बाद एसीबी अधिकारियों ने मामले की प्राथमिक जांच की। जांच में शिकायत की पुष्टि होने के बाद दोनों कर्मचारियों को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई गई। इसके तहत सोमवार शाम शिकायतकर्ता पूर्व कर्मचारी को रिश्वत की रकम लेकर दोनों कर्मचारियों के पास भेजा गया। जैसे ही संजय और हरीश ने रकम स्वीकार की, पहले से निगरानी कर रही एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया।

एसीबी की कार्रवाई पूर्वी जोन स्थित एमसीडी कार्यालय के बाहर की गई। गिरफ्तारी के बाद दोनों कर्मचारियों को टीम अपने साथ ले गई। उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रिश्वत की मांग केवल उनके स्तर पर की गई थी या इसमें विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। एसीबी इस बात की भी जांच कर रही है कि लंबित बिलों को पास कराने के लिए कितनी रकम मांगी गई थी और रिश्वतखोरी का यह सिलसिला कब से चल रहा था।

एमसीडी के कर्मचारियों पर पहले भी कार्रवाई
एमसीडी के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार तथा रिश्वतखोरी के मामलों में एसीबी पहले भी कई बार कार्रवाई कर चुकी है। हाल ही में शाहदरा नार्थ जोन, जिसे अब उत्तर पूर्वी जोन के नाम से जाना जाता है, के तत्कालीन डीसी कर्नल अभिषेक कुमार मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी दिव्यांशु गौतम को चार लाख रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

इसके अलावा मार्च 2026 में शाहदरा साउथ जोन, जिसे अब पूर्वी जोन कहा जाता है, के सहायक अभियंता हुकम सिंह मीणा को लंबित बिल के सत्यापन से जुड़ी फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि एसीबी एमसीडी के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर लगातार निगरानी रख रही है।

वर्ष 2025 में भी एमसीडी की जूनियर लॉ ऑफिसर रेनू सोनी और अपीलीय न्यायाधिकरण के अहलमद विकास भारती को रिश्वत के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं, 2 अगस्त 2024 को निहाल विहार क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति देने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में एमसीडी के बेलदार राजकुमार और उसके सहयोगी अजय कुमार गोस्वामी को पकड़ा गया था।

अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच
सोमवार की कार्रवाई के बाद एमसीडी के कामकाज में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान और बिलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई जा रही है।

एसीबी अब यह पता लगाने में जुटी है कि संजय और हरीश ने व्यक्तिगत रूप से रिश्वत मांगी थी या वे किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। जांच के दौरान दोनों के संपर्क, संबंधित फाइलों और लंबित बिलों की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।