Toll Tax New Rules: अब टोल बकाया पर फिटनेस बंद, केंद्र सरकार का सख्त फैसला

Wed 21-Jan-2026,12:25 PM IST +05:30

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Toll Tax New Rules: अब टोल बकाया पर फिटनेस बंद, केंद्र सरकार का सख्त फैसला Toll Tax New Rules 2026
  • टोल बकाया होने पर फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण नहीं.

  • इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने की पहल.

  • टोल चोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार का सख्त फैसला.

Delhi / Delhi :

Delhi / राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन मालिकों के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम और सख्त फैसला लिया है। टोल टैक्स की वसूली को पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस संशोधन के बाद यदि किसी वाहन पर टोल टैक्स का बकाया दर्ज है, तो उससे जुड़ी कई जरूरी सेवाएं स्वतः रुक जाएंगी। सरकार के इस कदम को इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को मजबूत करने और टोल चोरी पर पूरी तरह रोक लगाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

नए नियमों के तहत अब वाहन मालिकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि उनके वाहन पर किसी भी प्रकार का टोल बकाया न हो। यदि इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली में अनपेड यूजर फी दर्ज है, तो वाहन से जुड़े प्रशासनिक कार्य पूरे नहीं हो सकेंगे। इनमें सबसे अहम है वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट, जिसे समय-समय पर नवीनीकरण कराना जरूरी होता है। मंत्रालय ने साफ किया है कि जब तक लंबित टोल शुल्क का भुगतान नहीं किया जाएगा, तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट को रिन्यू नहीं किया जाएगा।

सरकार ने अनपेड यूजर फी की स्पष्ट परिभाषा भी तय की है। इसके अनुसार, वह टोल शुल्क जिसे इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली ने रिकॉर्ड तो किया है, लेकिन जिसका भुगतान राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत प्राप्त नहीं हुआ है, उसे अनपेड यूजर फी माना जाएगा। यानी यदि फास्टैग या अन्य डिजिटल सिस्टम में किसी टोल प्लाजा पर वाहन का गुजरना दर्ज है और भुगतान नहीं हुआ है, तो उसका सीधा असर वाहन की वैधानिक स्थिति पर पड़ेगा।

फिटनेस सर्टिफिकेट के अलावा नए नियमों का असर नेशनल परमिट पर भी पड़ेगा। खास तौर पर कमर्शियल और मालवाहक वाहनों के लिए यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। अब किसी भी वाहन को नेशनल परमिट जारी करने या पहले से जारी परमिट को बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य होगा कि वाहन पर कोई भी टोल बकाया न हो। यदि बकाया पाया गया, तो न तो नया परमिट मिलेगा और न ही पुराने परमिट को वैध रखा जा सकेगा। इससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में नियमों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ेगी।

इसके साथ ही वाहन की एनओसी से जुड़े मामलों में भी यही शर्त लागू होगी। यदि कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी को दूसरे राज्य में ट्रांसफर करना चाहता है या किसी अन्य कारण से एनओसी की जरूरत पड़ती है, तो पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उस वाहन पर कोई भी अनपेड टोल दर्ज न हो। बकाया रहने की स्थिति में एनओसी जारी नहीं की जाएगी।

सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ईमानदार वाहन चालकों और टोल भुगतान करने वालों के हितों की रक्षा करना है। लंबे समय से यह शिकायत सामने आती रही है कि कुछ वाहन चालक जानबूझकर टोल भुगतान से बचते हैं, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान होता है। नए नियमों के जरिए ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगेगी और राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव एवं विकास के लिए जरूरी संसाधन सुनिश्चित हो सकेंगे।

हालांकि, परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने यह भी मांग की है कि फास्टैग और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़ी तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर किया जाए। कई बार गलत तरीके से बकाया दर्ज हो जाने से वाहन मालिकों को परेशानी हो सकती है। मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा, ताकि वास्तविक मामलों में वाहन मालिकों को अनावश्यक दिक्कत न उठानी पड़े।

कुल मिलाकर, केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में किया गया यह संशोधन टोल वसूली व्यवस्था को अधिक अनुशासित और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका सीधा असर वाहन मालिकों की जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल भुगतान की संस्कृति पर देखने को मिलेगा।