हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली में सड़क परियोजनाओं व ट्रैफिक जाम कम करने की समीक्षा की
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दिल्ली में सड़क अवसंरचना सुधार और यातायात जाम कम करने के लिए केंद्र व राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय तेज किया गया।
UER-II, द्वारका एक्सप्रेसवे और प्रमुख कॉरिडोरों के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर।
भीड़भाड़ कम करने से उत्सर्जन, यात्रा समय और लॉजिस्टिक लागत घटेगी, जिससे आर्थिक उत्पादकता बढ़ेगी।
दिल्ली/ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सड़क अवसंरचना को आधुनिक, सुगम और भीड़भाड़ मुक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग एवं कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने हाल ही में दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें प्रमुख सड़क परियोजनाओं और ट्रैफिक जाम कम करने की पहलों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य को साकार करना और राजधानी को भविष्य के लिए तैयार, बेहतर कनेक्टिविटी वाला तथा नागरिकों के अनुकूल बनाना रहा। इस दौरान एनएचएआई, दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग एवं कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली को प्रभावित करने वाली प्रमुख सड़क अवसंरचना परियोजनाओं, यातायात जाम कम करने की रणनीतियों और अंतर-एजेंसी समन्वय से जुड़े मुद्दों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में पश्चिम दिल्ली की सांसद श्रीमती कमलजीत सहरावत, दिल्ली के मुख्य सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तथा एनएचएआई, डीडीए, दिल्ली पुलिस, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली परिवहन विभाग सहित कई एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक की शुरुआत में मंत्री श्री मल्होत्रा ने कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली को आधुनिक, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि “विकसित दिल्ली” का निर्माण भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए गए बुनियादी ढांचे, एकीकृत योजना, सतत परिवहन और नागरिक-केंद्रित डिजाइन पर आधारित होना चाहिए।
मंत्री ने शहरी विस्तार सड़क-II (UER-II) के साथ प्रस्तावित द्वितीयक सेवा सड़कों की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना फिलहाल डीपीआर चरण में है। स्थानीय निवासियों की सुरक्षा, पहुंच और आसपास की कॉलोनियों से बेहतर कनेक्टिविटी को लेकर उठी चिंताओं को देखते हुए मंत्री ने डीडीए को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनएचएआई और डीडीए के बीच मजबूत समन्वय से ही समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य संभव है।
UER-II के खुलने के बाद द्वारका उप-शहर में बढ़े यातायात जाम पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री और सांसद कमलजीत सहरावत ने माना कि मास्टर प्लान के अनुरूप निर्माण के बावजूद आंतरिक सड़कों पर ट्रैफिक के बेहतर वितरण की आवश्यकता है। मंत्री ने DDA, MCD, PWD और अन्य एजेंसियों को निर्देश दिया कि वैकल्पिक मार्ग, हवाई अड्डा और गुरुग्राम कॉरिडोर से बेहतर कनेक्टिविटी, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के साथ समन्वय तथा स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम जैसे उपायों पर तेजी से काम किया जाए।
इसके अलावा, पीडब्ल्यूडी से एनएचएआई को सौंपे गए तीन प्रमुख मार्गों आश्रम से बदरपुर सीमा तक मथुरा रोड, पंजाबी बाग से टिकरी सीमा तक पुरानी दिल्ली-रोहतक रोड और महरौली से गुरुग्राम तक महरौली-गुरुग्राम रोड की स्थिति की समीक्षा की गई। लगभग 33 किलोमीटर लंबी इन सड़कों का चौड़ीकरण और मरम्मत कार्य दिल्ली और एनसीआर की कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम है। मंत्री ने इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
दिल्ली भीड़भाड़ कम करने की समग्र योजना पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि ट्रैफिक जाम कम करने से न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि उत्सर्जन में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और आर्थिक उत्पादकता में वृद्धि भी होगी। इस योजना के तहत दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, द्वारका एक्सप्रेसवे, यूईआर-II और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के विस्तार को रणनीतिक रूप से जोड़ा जा रहा है।
बैठक के अंत में मंत्री ने सीआरआईएफ और सेतु बंधन योजनाओं के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। भूमि हस्तांतरण, मार्ग अधिकार और विभिन्न मंजूरियों से जुड़े लंबित मुद्दों को शीघ्र सुलझाने पर सहमति बनी। अपने समापन वक्तव्य में श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि “विकसित दिल्ली–भीड़भाड़ मुक्त दिल्ली” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी एजेंसियों को मिलकर, समयबद्ध और समन्वित प्रयास करने होंगे।